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चाणक्य के 5 अनमोल विचार
नीतिशास्त्री · ईसा पूर्व 375–283
काम पूरा होने से पहले अपनी योजना किसी को न बताएं, वरना काम बिगड़ सकता है।
— चाणक्य
संकट के समय ही मनुष्य के धैर्य, बुद्धि, पराक्रम और उसके सच्चे मित्रों की असली परीक्षा होती है।
— चाणक्य
जिस प्रकार एक फूल की सुगंध हवा की दिशा में फैलती है, वैसे ही व्यक्ति के अच्छे कर्मों का यश चारों दिशाओं में फैलता है।
— चाणक्य
सांप जहरीला न भी हो, तो भी उसे खुद को जहरीला दिखाना चाहिए।
— चाणक्य
भगवान मूर्खों की लकड़ी या पत्थर की मूर्तियों में नहीं रहते, असली ईश्वर तो भावनाओं में बसते हैं।
— चाणक्य
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वाह वाह यार पर पूरी जानकारी हिंदी में।
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