amp-story-page{background:#0B1E2D}.pad{padding:44px 34px;justify-content:center}.kick{display:inline-block;background:#E8B84A;color:#0B1E2D;font:700 13px/1 "Hind",sans-serif;padding:7px 14px;border-radius:14px;margin-bottom:14px;align-self:flex-start}h2.t{font:700 34px/1.35 "Hind",sans-serif;color:#fff;margin:0 0 14px}p.b{font:400 24px/1.7 "Hind",sans-serif;color:#EAF0F4;margin:0}.f{margin-top:18px;font:700 18px/1.4 "Hind",sans-serif;color:#E8B84A}{"ad-attributes":{"type":"adsense","data-ad-client":"ca-pub-2451990480109178","data-ad-slot":"1436043545"}}काव्य
भीष्म साहनी के 5 अनमोल विचार
कथाकार · 1915–2003
डर और संकीर्णता मनुष्य को हिंसक बनाते हैं, जबकि प्रेम और समझदारी ही हमें इंसान बनाए रखते हैं।
— भीष्म साहनी
सच्चा साहित्य वही है जो शोषित और पीड़ित मनुष्य के आंसुओं को पोंछने की कुव्वत रखता हो।
— भीष्म साहनी
रूढ़ियों और अंधविश्वासों की बेड़ियां जब तक नहीं कटेंगी, समाज सच्ची प्रगति की राह पर नहीं चल सकता।
— भीष्म साहनी
कला का असली मर्म यही है कि वह समाज के अंधेरे कोनों में उम्मीद की एक छोटी सी रोशनी जला सके।
— भीष्म साहनी
एक लेखक के लिए मानवीय करुणा और न्यायप्रियता सबसे बड़े मूल्य हैं।
— भीष्म साहनी
सभी विचार पढ़ें
वाह वाह यार पर पूरी जानकारी हिंदी में।
सभी विचार पढ़ें