
पुस्तकें ज्ञान का सबसे उत्तम भंडार हैं, जो
मनुष्य को अज्ञान के अंधेरे से निकालती हैं।
— थॉमस एडिसन
थॉमस एडिसन की यह पंक्ति इस शाश्वत सत्य को रेखांकित करती है कि पुस्तकें केवल पन्नों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान और चेतना का अनमोल स्रोत हैं। यह विचार दर्शाता है कि एक महान वैज्ञानिक और आविष्कारक होते हुए भी एडिसन का दृष्टिकोण अत्यंत विचारशील और व्यावहारिक था। वे मानते थे कि अज्ञानता ही जीवन का सबसे बड़ा अंधकार है, और पठन-पाठन ही वह ज्योति है जो मनुष्य के भीतर विवेक, वैज्ञानिक सोच तथा सही-गलत की समझ जगाती है। यह कथन उनके जिज्ञासु और स्वाध्यायी मिजाज का सुंदर प्रमाण है।
आज के डिजिटल युग में, जहाँ आधी-अधूरी जानकारी और भ्रामक सूचनाओं का बोलबाला है, इस पंक्ति का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। वर्तमान संदर्भ में पुस्तकें हमें केवल तथ्य नहीं देतीं, बल्कि गंभीर चिंतन और मानसिक परिपक्वता भी सिखाती हैं। मोबाइल और सोशल मीडिया के इस दौर में पुस्तकें हमें सतही ज्ञान के भटकाव से बचाकर सत्य और गहराई की ओर ले जाती हैं। वास्तव में, पुस्तकें आज भी मानव समाज को अज्ञानता के अंधेरे से निकालकर प्रगति के मार्ग पर ले जाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
थॉमस एडिसन की चुनी हुई पंक्तियाँ
थॉमस एडिसन के बारे में
थॉमस एल्वा एडिसन (1847–1931) एक महान अमेरिकी आविष्कारक और व्यवसायी थे। उन्होंने व्यावहारिक बिजली बल्ब, फोनोग्राफ और मोशन पिक्चर कैमरा जैसी क्रांतिकारी तकनीकें दीं। उन्हें इतिहास के सबसे महान और प्रभावशाली नवप्रवर्तकों में गिना जाता है। पूरा परिचय और सभी विचार: थॉमस एडिसन — लेखक कोश।
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