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11 Jan 2023 · Wah Wah Yar Digital Desk · 1 मिनट का पाठ
Parasnath News: पहाड़ आदिवासियों का पारंपरिक धर्म स्थल जो प्राचीन काल से है.

पारसनाथ मधुबन, पीरटांड़ गिरिडीह – दिनांक 10.01.2023 को मारांग बुरू संवता सुसर वैसी एवं अन्य आदिवासी समाजिक संगठनों द्वारा मधुबन, पारसनाथ में रैली एवं जनसभा का आयोजन किया गया था। इस जनसभा…….

प्रवीण कच्छप और रतन सिंह मुण्डा

पारसनाथ, मधुबन, पीरटांड़ गिरिडीह – दिनांक 10.01.2023 को मारांग बुरू संवता सुसर वैसी एवं अन्य आदिवासी समाजिक संगठनों द्वारा मधुबन, पारसनाथ में रैली एवं जनसभा का आयोजन किया गया था। इस जनसभा में राज्य और देश भर से आदिवासी जनप्रतिनिधि शामिल हुए। जिसमें तमाड़, रांँची के आदिवासी समाजिक अगुवा रतन सिंह मुण्डा एवं रांँची के जुझारू युवा समाजिक कार्यकर्ता प्रवीण कच्छप अतिथि के रूप में शामिल हुए।

रैली में आए आदिवासी मूलवासी का भीड़

पारसनाथ पहाड़ आदिवासियों का पारंपरिक धर्म स्थल है

अपने सम्बोधन में रतन सिंह मुण्डा ने कहा कि पारसनाथ पहाड़ आदिवासियों का पारंपरिक धर्म स्थल है जो आज से नहीं बल्कि अति प्राचीन काल से है। जैन धर्मावलंबियों को हमारे पुरखे शरण दिये थे। ये शरणार्थी लोग आज मूल आदिवासी को ही मारांग बुरू की पूजा अर्चना करने से रोक लगाने की मांग कर रहे हैं जो गैरकानूनी है। हजारीबाग गजट नोटिफिकेशन चिख चिख के बोल रहा है कि पारसनाथ पहाड़ मारांग बुरू पूजा स्थल के नाम से आदिवासियों के लिए आरक्षित है,जो यहांँ के मूल रैयत लोग का है। श्री मुण्डा ने कहा हम सभी समुदायों के धर्म का सम्मान करते हैं इसका मतलब ये नहीं कि अपनी धार्मिक पहचान को मिटा कर दुसरे के धार्मिक भावनाओं को सहेजते चले जाएं।

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Parasnath News praween and ratan singh munda
JMM विधायक लोबिन हेमरोम के साथ प्रवीण कच्छप और रतन सिंह मुण्डा

अपने हिस्से की लड़ाई खुद लड़नी होगी

युवा सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण कच्छप ने कहा आज हमें धर्म के नाम पर पारसनाथ पहाड़ छोड़ने को कहा जा रहा है। कल पूरे राज्य के जल-जंगल-जमीन को छोड़ने की बात करेंगे। ये जैन धर्मावलंबी, ये कत्तई बर्दाश्त नहीं होगा। उन्हें हमारे पूर्वजों ने पूजा अर्चना के लिए मंदिर निर्माण की जगह सुनिश्चित कर दिए हैं के बावजूद अब हमारे ही जमीन पर हमें ही प्रवेश पर पाबंदी की मांँग करना सरासर गलत है।

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parasnath hill protest by adiwasi
दिनांक 10.01.2023 को पारसनाथ में उमड़ी भीड़


श्री कच्छप ने युवाओं से अपील करते हुए कहा आज युवाओं को अपने अपने हिस्से की लड़ाई खुद लड़नी होगी, तभी हमारी धर्म संस्कृति बचेगी, अन्यथा जैन अतिक्रमणकारियों द्वारा जबरन छिना जाएगा। श्री कच्छप ने आक्रोशित शब्दों में कहा कि पारसनाथ पहाड़ आदिवासियों का है आदिवासियों का ही रहेगा जैनियों को जो पूर्वजों द्वारा मिला उससे अधिक एक सुई भी गाड़ने की जमीन नहीं दी जाएगी पहाड़ तो दूर की बात है।

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Wah Wah Yar Digital Desk
लेखकWah Wah Yar Digital Desk

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प्रकाशित: 11 January 2023 · अपडेट: 12 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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