
- टर्म इंश्योरेंस आपकी सालाना कमाई का कम से कम 10 से 15 गुना होना चाहिए।
- हेल्थ इंश्योरेंस का कवर आपके शहर के हिसाब से कम से कम ₹5 लाख से ₹10 लाख होना चाहिए।
- पॉलिसी लेते समय क्लेम सेटलमेंट रेशियो (Claim Settlement Ratio) ज़रूर चेक करें।
- सरकारी योजनाएं जैसे आयुष्मान भारत और पीएम सुरक्षा बीमा योजना कम बजट में बड़ा सहारा हैं।
- कम उम्र में इंश्योरेंस लेने से प्रीमियम बहुत कम आता है और यह जिंदगी भर के लिए लॉक हो जाता है।
जब बात परिवार की सुरक्षा और बीमारियों के भारी-भरकम खर्च से बचने की आती है, तो टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस ही सबसे बड़े मददगार साबित होते हैं। लेकिन अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि उन्हें कितने लाख या करोड़ रुपये का इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए। अगर आप जरूरत से कम का कवर लेते हैं, तो मुसीबत के समय जेब से पैसे देने पड़ते हैं, और अगर बहुत ज्यादा कवर लेते हैं, तो भारी-भरकम प्रीमियम चुकाना पड़ता है जो आपके मंथली बजट को बिगाड़ देता है। इसलिए, अपनी जरूरत के हिसाब से सही कवर का चुनाव करना बेहद जरूरी है।
टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस क्यों हैं ज़रूरी?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत और जीवन दोनों ही अनिश्चितताओं से घिरे हुए हैं। कब किसे क्या बीमारी हो जाए या कब कोई अनहोनी हो जाए, यह कोई नहीं जानता। ऐसे में वित्तीय सुरक्षा का होना बहुत जरूरी है। टर्म इंश्योरेंस आपके न रहने पर आपके परिवार को आर्थिक तंगी से बचाता है, जबकि हेल्थ इंश्योरेंस अस्पताल के महंगे खर्चों को संभालता है ताकि आपकी सालों की जमा-पूंजी एक झटके में खत्म न हो जाए।
भारत के मध्यमवर्गीय परिवारों में अक्सर देखा गया है कि एक गंभीर बीमारी पूरे परिवार को कर्ज के जाल में धकेल देती है। चाहे आप उत्तर प्रदेश के किसी छोटे शहर में रहते हों या मुंबई जैसे बड़े महानगर में, अस्पताल का एक हफ्ता का खर्च आपकी पूरी बचत को साफ कर सकता है। इसी तरह, परिवार के कमाने वाले सदस्य की अचानक मृत्यु हो जाने पर बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और लोन की EMI चुकाना नामुमकिन हो जाता है।
जिंदगी की इन अनिश्चितताओं के बीच सकारात्मक बने रहना और सही वित्तीय फैसले लेना ही समझदारी है। अगर आप जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा चाहते हैं, तो हमारे लाइफ मोटिवेशनल सुविचार और कोट्स पढ़ सकते हैं, जो आपको मुश्किल वक्त में भी हिम्मत देंगे। इंश्योरेंस का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि आपके जाने के बाद या आपके बीमार होने पर आपका परिवार बिना किसी आर्थिक डर के सम्मान के साथ जी सके।
टर्म इंश्योरेंस: आपको कितने लाख या करोड़ का कवर चाहिए?
टर्म इंश्योरेंस लेते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि “मुझे कितने का बीमा कराना चाहिए?” इसका एक बहुत ही सरल और सर्वमान्य नियम है — आपकी सालाना आय का कम से कम 10 से 15 गुना। उदाहरण के लिए, यदि आप मध्य प्रदेश के इंदौर या बिहार के पटना में रहते हैं और आपकी सालाना कमाई ₹8 लाख है, तो आपके पास कम से कम ₹80 लाख से ₹1.2 करोड़ तक का टर्म इंश्योरेंस कवर होना चाहिए।
लेकिन सिर्फ सालाना आय ही काफी नहीं है। आपको अपनी देनदारियों (Liabilities) पर भी ध्यान देना होगा। अगर आपने होम लोन, कार लोन या कोई पर्सनल लोन ले रखा है, तो उसे भी इस कवर अमाउंट में जोड़ना चाहिए। मान लीजिए आपके ऊपर ₹30 लाख का होम लोन बकाया है, तो आपका कुल टर्म कवर कम से कम ₹1.5 करोड़ होना चाहिए ताकि आपके न रहने पर परिवार आसानी से लोन चुका सके और उनके सिर से छत न छिने।
इसके अलावा, बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी और जीवनसाथी के बुढ़ापे के खर्चों को भी ध्यान में रखना चाहिए। आज की महंगाई दर को देखते हुए भविष्य के खर्चों का अनुमान लगाना बेहद जरूरी है। आप अपनी वित्तीय गणनाओं और लोन की किस्तों को समझने के लिए हमारे फ्री ईएमआई और एसआईपी कैलकुलेटर टूल्स का उपयोग कर सकते हैं, जिससे आपको सटीक अंदाजा मिल जाएगा कि आपको अपनी लायबिलिटी के हिसाब से कितना कवर चाहिए।
हेल्थ इंश्योरेंस: बीमारी के खर्च से बचने के लिए कितना कवर लें?
हेल्थ इंश्योरेंस का कवर इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस शहर में रहते हैं और आपका परिवार कितना बड़ा है। महानगरों (जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु) में इलाज का खर्च बहुत ज्यादा है, जबकि टियर-2 और टियर-3 शहरों (जैसे झारखंड का रांची, राजस्थान का जयपुर या छत्तीसगढ़ का रायपुर) में यह थोड़ा कम हो सकता है। फिर भी, आज के समय में एक व्यक्ति के लिए कम से कम ₹5 लाख और एक परिवार (पति, पत्नी और दो बच्चे) के लिए ₹10 लाख का फैमिली फ्लोटर प्लान होना बेहद जरूरी है।
यदि आपके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता भी शामिल हैं, तो उनके लिए अलग से सीनियर सिटीजन हेल्थ प्लान लेना बेहतर होता है, क्योंकि उनकी बीमारियों के रिस्क ज्यादा होते हैं। इसके अलावा, आजकल कई गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर, किडनी फेल होना या दिल का दौरा पड़ना बहुत आम हो गई हैं। इन बीमारियों के इलाज में ₹15 से ₹25 लाख तक का खर्च आसानी से आ जाता है। इसलिए, बेसिक हेल्थ प्लान के साथ ‘क्रिटिकल इलनेस राइडर’ या ‘सुपर टॉप-अप’ प्लान लेना एक स्मार्ट फैसला होता है।
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय यह भी देखें कि पॉलिसी में ‘रूम रेंट लिमिट’ (कमरे के किराए की सीमा) क्या है। कई बार कंपनियां रूम रेंट पर 1% की सीमा लगा देती हैं, जिससे अस्पताल के अन्य खर्चों पर भी आनुपातिक कटौती (Proportionate Deduction) हो जाती है। इसलिए, हमेशा ‘नो रूम रेंट कैपिंग’ वाला प्लान ही चुनें, भले ही उसका प्रीमियम थोड़ा सा ज्यादा हो।
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: अपने लिए सही इंश्योरेंस पॉलिसी कैसे चुनें?
सही इंश्योरेंस पॉलिसी चुनना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस आपको एक व्यवस्थित तरीका अपनाना होगा। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आप अपने लिए सबसे बेहतरीन प्लान चुन सकते हैं:
स्टेप 1: अपनी वित्तीय स्थिति और देनदारियों का आकलन करें
सबसे पहले एक कागज पर अपनी सभी संपत्तियों (जैसे बैंक बैलेंस, म्यूचुअल फंड) और देनदारियों (जैसे होम लोन, पर्सनल लोन) को लिखें। अपने परिवार के मासिक खर्चों और बच्चों की भविष्य की जरूरतों का हिसाब लगाएं। इससे आपको पता चलेगा कि आपको वास्तव में कितने बड़े टर्म कवर की आवश्यकता है।
स्टेप 2: सही इंश्योरेंस कंपनी का चुनाव करें
बाजार में कई सरकारी और निजी बीमा कंपनियां मौजूद हैं, जैसे LIC, SBI लाइफ, एचडीएफसी एर्गो, और केयर हेल्थ। हमेशा ऐसी कंपनी चुनें जिसका क्लेम सेटलमेंट रेशियो (Claim Settlement Ratio) 97% से अधिक हो और क्लेम मिलने में लगने वाला समय कम हो। आप आईआरडीएआई (IRDAI) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर कंपनियों के प्रदर्शन की जांच कर सकते हैं।
स्टेप 3: नेटवर्क अस्पतालों की सूची जांचें
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय यह जरूर देखें कि आपके शहर (जैसे लखनऊ, पटना, रांची या भोपाल) के प्रमुख अस्पताल उस कंपनी के कैशलेस नेटवर्क में शामिल हैं या नहीं। आपातकालीन स्थिति में कैशलेस इलाज ही सबसे बड़ा सहारा होता है, जिससे आपको तुरंत जेब से पैसे नहीं देने पड़ते।
स्टेप 4: पॉलिसी के नियम और शर्तें (Fine Print) ध्यान से पढ़ें
पॉलिसी के नियम और शर्तों को पढ़ना उबाऊ लग सकता है, लेकिन यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है। वेटिंग पीरियड (पहले से मौजूद बीमारियों के लिए 2 से 4 साल का समय), को-पेमेंट क्लॉज (जहां आपको क्लेम का कुछ प्रतिशत खुद देना होता है) और सब-लिमिट्स को अच्छी तरह समझ लें।
स्टेप 5: प्रीमियम की तुलना करें और खरीदें
ऑनलाइन पोर्टल्स का उपयोग करके विभिन्न कंपनियों के प्रीमियम और फायदों की तुलना करें। कभी भी केवल सबसे सस्ता प्रीमियम देखकर पॉलिसी न खरीदें। कम प्रीमियम के चक्कर में अक्सर कई जरूरी कवर छूट जाते हैं। सभी फीचर्स को समझने के बाद ही अंतिम निर्णय लें।
टर्म वर्सेज हेल्थ इंश्योरेंस: दोनों में मुख्य अंतर क्या है?
कई लोग टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस को एक ही समझ लेते हैं या फिर दोनों में से किसी एक को ही चुनते हैं। लेकिन ये दोनों पूरी तरह से अलग हैं और दोनों का होना आपके पोर्टफोलियो में अनिवार्य है। नीचे दी गई तालिका से आप इनके बीच के मुख्य अंतर को आसानी से समझ सकते हैं:
| विशेषता (Feature) | टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) | हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद परिवार को वित्तीय सुरक्षा देना। | बीमारी या दुर्घटना के समय अस्पताल के खर्चों को संभालना। |
| किसे मिलता है लाभ? | पॉलिसीधारक के नामांकित व्यक्ति (Nominee) को। | स्वयं पॉलिसीधारक और उसके परिवार को (कैशलेस या रीइंबर्समेंट)। |
| प्रीमियम की दर | बहुत कम प्रीमियम में बहुत बड़ा कवर (जैसे ₹10-15 हजार सालाना में ₹1 करोड़)। | उम्र और सदस्यों की संख्या के हिसाब से मध्यम से उच्च प्रीमियम। |
| टैक्स छूट (Income Tax) | आयकर की धारा 80C के तहत छूट मिलती है। | आयकर की धारा 80D के तहत छूट मिलती है। |
| पॉलिसी की अवधि | लंबे समय के लिए (जैसे 30 या 40 साल के लिए फिक्स)। | आमतौर पर हर साल रिन्यू करानी पड़ती है। |
इंश्योरेंस लेते समय लोग अक्सर क्या गलतियां करते हैं?
जैसे लोग घर या प्रॉपर्टी खरीदते समय कई तरह की चूक कर बैठते हैं, ठीक वैसे ही इंश्योरेंस लेते समय भी कुछ आम गलतियां होती हैं जो बाद में बहुत भारी पड़ती हैं। उदाहरण के लिए, लोग अक्सर बिना सोचे-समझे प्रॉपर्टी खरीद लेते हैं, जिसके बारे में आप हमारे लेख घर बनाते समय की जाने वाली 15 गलतियां में पढ़ सकते हैं। इंश्योरेंस के मामले में भी ऐसी ही गलतियों से बचना चाहिए:
- पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing Diseases) को छुपाना: लोग प्रीमियम कम रखने या पॉलिसी रिजेक्ट होने के डर से अपनी बीमारियों (जैसे शुगर, बीपी, थायराइड) की जानकारी छुपा लेते हैं। क्लेम के समय जब कंपनी को इसका पता चलता है, तो वे तुरंत क्लेम खारिज कर देते हैं।
- केवल एम्प्लॉयर (कंपनी) के हेल्थ कवर पर निर्भर रहना: बहुत से लोग सोचते हैं कि उनकी कंपनी ने उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस दे रखा है, तो अलग से लेने की क्या जरूरत है। लेकिन याद रखें, यह कवर केवल तब तक है जब तक आप उस नौकरी में हैं। नौकरी बदलने के दौरान या मंदी के समय नौकरी जाने पर आप बिना किसी कवर के रह जाएंगे।
- देर से इंश्योरेंस खरीदना: लोग सोचते हैं कि 25 या 30 साल की उम्र में इंश्योरेंस की क्या जरूरत है, इसे 45 की उम्र में देखा जाएगा। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ बीमारियां बढ़ती हैं, जिससे प्रीमियम बहुत ज्यादा हो जाता है या फिर कंपनी पॉलिसी देने से ही मना कर देती है।
- रिटर्न ऑफ प्रीमियम (ROP) के चक्कर में पड़ना: कई लोग सोचते हैं कि अगर वे टर्म इंश्योरेंस के दौरान जीवित रहे, तो उनका पैसा डूब जाएगा। इसलिए वे ‘रिटर्न ऑफ प्रीमियम’ वाला प्लान लेते हैं। यह एक बड़ी गलती है क्योंकि इसका प्रीमियम साधारण टर्म प्लान से दोगुना होता है। बचे हुए पैसों को आप म्यूचुअल फंड या पीपीएफ में निवेश करके कहीं बेहतर रिटर्न पा सकते हैं।
सरकारी बीमा योजनाएं: कम बजट वालों के लिए बेहतरीन विकल्प
अगर आपका बजट कम है और आप निजी कंपनियों का महंगा प्रीमियम नहीं चुका सकते, तो केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाएं आपके लिए वरदान साबित हो सकती हैं। इन योजनाओं का लाभ देश का कोई भी नागरिक उठा सकता है, चाहे वह उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाके में रहता हो या राजस्थान के किसी मरुस्थलीय गांव में।
1. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY): यह एक बेहतरीन सरकारी टर्म इंश्योरेंस योजना है। इसमें केवल ₹436 सालाना के प्रीमियम पर ₹2 लाख का लाइफ कवर मिलता है। 18 से 50 वर्ष की उम्र का कोई भी व्यक्ति जिसके पास बैंक खाता है, इसमें शामिल हो सकता है।
2. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): यह एक दुर्घटना बीमा योजना है। इसमें केवल ₹20 सालाना के बहुत ही मामूली प्रीमियम पर ₹2 लाख का दुर्घटना मृत्यु और पूर्ण विकलांगता कवर मिलता है। यह योजना हर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लिए अनिवार्य होनी चाहिए।
3. आयुष्मान भारत योजना (PM-JAY): यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके तहत गरीब और कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है। देश के हजारों सरकारी और निजी अस्पतालों में इस कार्ड के जरिए कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इन योजनाओं के नियमों और पात्रता की ताजा जानकारी के लिए हमेशा संबंधित सरकारी विभाग या आधिकारिक सरकारी पोर्टल की साइट को जरूर देखें।
उम्र के हिसाब से इंश्योरेंस कवर और प्रीमियम का गणित
इंश्योरेंस का प्रीमियम पूरी तरह से आपकी उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। जितनी कम उम्र में आप पॉलिसी लेंगे, प्रीमियम उतना ही कम होगा और वह हमेशा के लिए लॉक हो जाएगा। नीचे दी गई तालिका में एक स्वस्थ, गैर-धूम्रपान करने वाले (Non-Smoker) व्यक्ति के लिए उम्र के हिसाब से अनुमानित कवर और प्रीमियम की रेंज दी गई है:
| उम्र (वर्ष) | सुझाया गया टर्म कवर | सुझाया गया हेल्थ कवर | अनुमानित सालाना प्रीमियम रेंज (रुपये में) |
|---|---|---|---|
| 25 वर्ष | ₹1 करोड़ | ₹5 लाख | ₹8,000 से ₹12,000 |
| 35 वर्ष | ₹1 करोड़ | ₹10 लाख (फैमिली) | ₹15,000 से ₹22,000 |
| 45 वर्ष | ₹1.5 करोड़ | ₹15 लाख (फैमिली) | ₹28,000 से ₹42,000 |
नोट: ऊपर दिए गए आंकड़े केवल एक अनुमानित रेंज हैं। वास्तविक प्रीमियम आपकी व्यक्तिगत आदतों (जैसे धूम्रपान या शराब का सेवन), पहले से मौजूद बीमारियों और चुनी गई बीमा कंपनी के नियमों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। पॉलिसी खरीदने से पहले सभी दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें।
यदि आप पर्सनल फाइनेंस, निवेश और बीमा के बारे में और अधिक विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, तो हमारे अनुभवी लेखकों की टीम द्वारा लिखे गए लेखों को पढ़ सकते हैं, जिनकी जानकारी आपको हमारे लेखक कोश में मिल जाएगी। वे समय-समय पर पाठकों को जागरूक करने के लिए ऐसे ही ज्ञानवर्धक लेख लिखते रहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: क्या मुझे एम्प्लीयर (कंपनी) के हेल्थ इंश्योरेंस के बाद भी अलग से पॉलिसी लेनी चाहिए?
जवाब: हां, बिल्कुल लेनी चाहिए। कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस केवल तब तक वैध रहता है जब तक आप वहां काम कर रहे हैं। नौकरी बदलने के दौरान, रिटायरमेंट के बाद या नौकरी जाने की स्थिति में आप बिना किसी कवर के हो जाएंगे। इसके अलावा, कंपनी की पॉलिसी में कई बार को-पेमेंट या रूम रेंट जैसी सीमाएं होती हैं।
सवाल 2: टर्म इंश्योरेंस में ‘रिटर्न ऑफ प्रीमियम’ (ROP) लेना चाहिए या नहीं?
जवाब: सामान्यतः नहीं लेना चाहिए। रिटर्न ऑफ प्रीमियम प्लान का प्रीमियम साधारण टर्म प्लान की तुलना में बहुत अधिक होता है। आपको हमेशा एक शुद्ध (Pure) टर्म प्लान लेना चाहिए और बचे हुए पैसों को किसी अच्छे म्यूचुअल फंड या सरकारी बचत योजना में निवेश करना चाहिए, जिससे आपको बेहतर रिटर्न मिल सके।
सवाल 3: क्या धूम्रपान (Smoking) करने से प्रीमियम बढ़ जाता है?
जवाब: हां, धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के लिए टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में लगभग 40% से 70% तक अधिक हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि धूम्रपान करने वालों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और मृत्यु दर का खतरा अधिक होता है। पॉलिसी लेते समय इस बात को कभी न छुपाएं।
सवाल 4: हेल्थ इंश्योरेंस में वेटिंग पीरियड (Waiting Period) क्या होता है?
जवाब: वेटिंग पीरियड वह समय सीमा है जिसके दौरान आप कुछ खास बीमारियों या पहले से मौजूद बीमारियों (जैसे मोतियाबिंद, पथरी, या बीपी-शुगर) के इलाज के लिए क्लेम नहीं कर सकते। आमतौर पर पहले से मौजूद बीमारियों के लिए यह अवधि 2 से 4 साल की होती है, जबकि दुर्घटनाओं के लिए कोई वेटिंग पीरियड नहीं होता (यह पहले दिन से कवर होती हैं)।
सवाल 5: क्या मैं अपनी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी को बीच में बंद कर सकता हूँ?
जवाब: हां, आप जब चाहें अपनी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी को प्रीमियम देना बंद करके रद्द कर सकते हैं। हालांकि, एक शुद्ध टर्म प्लान में पॉलिसी बंद करने पर आपको पहले चुकाया गया कोई भी प्रीमियम वापस नहीं मिलेगा, और आपकी लाइफ कवरेज भी उसी समय समाप्त हो जाएगी।
सवाल 6: नो क्लेम बोनस (No Claim Bonus) क्या है और यह कैसे काम करता है?
जवाब: अगर आप किसी पॉलिसी वर्ष के दौरान कोई क्लेम नहीं करते हैं, तो बीमा कंपनी आपको ‘नो क्लेम बोनस’ देती है। इसके तहत अगले वर्ष बिना प्रीमियम बढ़ाए आपकी बीमा राशि (Sum Insured) को एक निश्चित प्रतिशत (आमतौर पर 10% से 50%) तक बढ़ा दिया जाता है। यह एक तरह का इनाम होता है जो आपकी सुरक्षा को मजबूत करता है।
सवाल 7: क्या गंभीर बीमारियों (Critical Illness) के लिए अलग से राइडर लेना ज़रूरी है?
जवाब: हां, क्रिटिकल इलनेस राइडर लेना एक बहुत ही समझदारी भरा फैसला है। सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस केवल अस्पताल के खर्चों को कवर करता है, जबकि क्रिटिकल इलनेस राइडर के तहत कैंसर या हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी का पता चलते ही कंपनी आपको एकमुश्त (Lump-sum) बड़ी रकम दे देती है, जिसका उपयोग आप इलाज या घर के खर्चों के लिए कर सकते हैं।
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