वाह वाह यारहिंदी में जानकारी · पूरे भारत के लिए
मेनू
WhatsApp चैनल
18 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
अज्ञेय: जो नहीं हो सका पूर्ण, उसे भी पूर्ण समझो;
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

जो नहीं हो सका पूर्ण, उसे भी पूर्ण समझो;

अधूरापन ही तो जीवन का सौंदर्य है।

— अज्ञेय

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की यह पंक्ति जीवन के अधूरेपन को सकारात्मक रूप से स्वीकारने का संदेश देती है। इसका अर्थ है कि जीवन में हर

अज्ञेय की चुनी हुई पंक्तियाँ

समय बहता नहीं, ठहरता है, बस उसे महसूस करने की फुर्सत किसी के पास नहीं।
कृतज्ञता केवल शब्दों में नहीं, बल्कि जीवन की हर साँस में होनी चाहिए।
समय के पहिए पर चलते-चलते मनुष्य अपनी ही छाया से साक्षात्कार करता है।
सत्य वह नहीं जो आरोपित हो, सत्य वह है जो भीतर से स्वयं अनुभूतिकृत हो।
आधुनिकता केवल बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि एक आंतरिक बौद्धिक चेतना है।
सत्य की खोज में मनुष्य को अकेले ही अनंतिम यात्रा पर निकलना पड़ता है।
इमानदारी कोई नीति नहीं, इंसान के अपने वजूद की सबसे बड़ी शर्त है।

अज्ञेय के बारे में

अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) हिंदी साहित्य के महान कवि, कथाकार, निबंधकार और संपादक थे। वे प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तक तथा 'तार सप्तक' के यशस्वी संपादक के रूप में अमर हैं। पूरा परिचय और सभी विचार: अज्ञेय — लेखक कोश

शेयर:FacebookTelegram

ये भी पढ़ें

awaraalfaz
लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 18 September 2026 · अपडेट: 18 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *