
जो नहीं हो सका पूर्ण, उसे भी पूर्ण समझो;
अधूरापन ही तो जीवन का सौंदर्य है।
— अज्ञेय
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की यह पंक्ति जीवन के अधूरेपन को सकारात्मक रूप से स्वीकारने का संदेश देती है। इसका अर्थ है कि जीवन में हर
अज्ञेय की चुनी हुई पंक्तियाँ
समय बहता नहीं, ठहरता है, बस उसे महसूस करने की फुर्सत किसी के पास नहीं।
कृतज्ञता केवल शब्दों में नहीं, बल्कि जीवन की हर साँस में होनी चाहिए।
समय के पहिए पर चलते-चलते मनुष्य अपनी ही छाया से साक्षात्कार करता है।
सत्य वह नहीं जो आरोपित हो, सत्य वह है जो भीतर से स्वयं अनुभूतिकृत हो।
आधुनिकता केवल बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि एक आंतरिक बौद्धिक चेतना है।
सत्य की खोज में मनुष्य को अकेले ही अनंतिम यात्रा पर निकलना पड़ता है।
इमानदारी कोई नीति नहीं, इंसान के अपने वजूद की सबसे बड़ी शर्त है।
अज्ञेय के बारे में
अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) हिंदी साहित्य के महान कवि, कथाकार, निबंधकार और संपादक थे। वे प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तक तथा 'तार सप्तक' के यशस्वी संपादक के रूप में अमर हैं। पूरा परिचय और सभी विचार: अज्ञेय — लेखक कोश।
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