झारखंड के पसमांदा समुदाय को क्यों जयराम महतो वाली पार्टी JBKSS/JLKM का समर्थन करना चाहिए?

झारखंड में कुल 14 लोकसभा की सीटें है। जिनमें 5 सूट अनूसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है वहीं 1 सीट अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित है। राज्य की कुल आबादी में 50 लाख से ज्यादा आबादी पसमांदा मुस्लिमों की है ये आदिवासी समुदाय के बाद और कुड़मी समुदाय के समानांतर है।

support Jairam Mahato's party JBKSS/JLKM

Jharkhand: सियासी हलचल में इस लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन (कांग्रेस+झामुमो+राजद+माले) ने एक भी पसमांदा समुदाय से किसी को उम्मीदवार नहीं बनाया है। बीजेपी पसमांदा का सिर्फ़ नाम लेती है लेकिन जब राजनीतिक हिस्सेदारी की बात आती है तो मौन व्रत अवस्था में चली जाती है बीजेपी का ये सांकेतिकवाद पसमांदा समुदाय के लिए साफ साफ नज़र आती है। कांग्रेस पार्टी आज कल जातिगत जनगणना की बात करती है। जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी हिस्सेदारी की बात करती है। सामाजिक न्याय की बात करती है। आबादी अनुसार अनुपातिक प्रतिनिधित्व का दम भरती है। लेकिन जब झारखंड के 16- 18 प्रतिशत पसमांदा समुदाय की हिस्सेदारी की सवाल पर आज मौन व्रत क्यों है? क्या पसमांदा समुदाय केवल वोटर बनकर कांग्रेस और झामुमो की सेवा करते रहेंगे? या कोई विकल्प की ओर अपनी संभावनाएं तलाश करेगी? जयराम कुमार महतो के नेतृत्व वाली सामाजिक संगठन – झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति (JBKSS) अब झारखंडी लोकतान्त्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) एक राजनीतिक दल बन चुकी है।

इकलाख अंसारी कौन है?

JLKM ने इकलाख अंसारी को धनबाद लोकसभा से प्रत्याशी घोषित किया है, इकलाख एक निजी स्कूल चलाते है और उन्होंने M.A. एवं B.Ed तक की शिक्षा हासिल की है, अंसारी शुरू से ही भाषा एवं खतियान आंदोलन से जुड़े रहे और JBKSS के सक्रिय सदस्य तौर पर काम करते रहे है। अंसारी धनबाद जिले के गोविंदपुर प्रखंड के परासी ग्राम के निवासी है। इसी गांव में इनका स्कूल भी है। इकलाख अंसारी मध्यम वर्ग और अंसारी – पसमांदा OBC वर्ग से ताल्लुक रखते है। राज्य में कुल मुसलमानों की 90 प्रतिशत से ज्यादा आबादी अंसारी – पसमांदा समुदाय की है जो सामाजिक, आर्थिक रूप से कमजोर है और राजनीतिक दलों ने अंसारी – पसमांदा बिरादरी को हाशिए पर धकेल दिया है। जयराम कुमार महतो ने जब इकलाख अंसारी को उम्मीदवार बनाया तो उन्होंने खुद कहा कि झारखंड राज्य की 16 – 18 प्रतिशत आबादी वाली समुदाय को राजनीतिक हिस्सेदारी से कैसे रोका जा सकता है? सभी राजनीतिक दल अगर हिस्सेदारी नहीं देकर गलती कर रहे है? तो हम उनको गलती को नहीं दोहराएंगे? महतो ने आगे कहा सभी राजनीतिक दलों ने अंसारी – पसमांदा समुदाय को झंडा ढोवाने का काम किया है लेकिन हम उन्हें आबादी अनुसार अनुपातिक प्रतिनिधित्व देने का काम करेंगे। महतो ने अंत में कहा कि हमने इकलाख अंसारी को धनबाद लोसकभा से उम्मीदवार बनाया है वे पढ़े – लिखे शिक्षित व्यक्ति है अगर सदन में पहुंचेंगे तो झारखंडियत की बात करेंगे।

गोड्डा लोकसभा पसमांदा समुदाय की परंपरागत सीट रही है जहां पसमांदा समुदाय की अच्छी आबादी है इस बार फुरकान अंसारी का भी टिकट काट दिया है। गोड्डा से पहले दीपिका पांडेय सिंह को उम्मीदवार बनाया फिर इसको बदलकर कल प्रदीप यादव को उम्मीदवार बनाया गया है।

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पसमांदा समुदाय की कहाँ कितनी आबादी है?

सबसे ज्यादा आबादी पसमांदा समुदाय की आबादी राजमहल लोकसभा में है 33%, जो ST के लिए आरक्षित है, फिर गोड्डा लोकसभा मे 24%, कोडरमा 22%, गिरिडीह 20%, हजारीबाग 20%, राँची 18%, धनबाद 18%, दुमका 18% जो ST के लिए आरक्षित है।

झारखंड के पसमांदा समुदाय JLKM को विकल्प के रूप में देख रहा है

इंडिया गठबंधन ने जिस तरह से पसमांदा समुदाय से किसी भी व्यक्ति को लोकसभा चुनाव मे टिकट नहीं दिया है इसको लेकर पसमांदा समुदाय में काफी आक्रोश है। दूसरी तरफ धनबाद लोकसभा से कांग्रेस ने बेरमो विधायक जयमंगल अनूप सिंह की पत्नी अनुपमा सिंह को किचन से उठाकर उम्मीदवार बनाया है उससे भी लोगों में काफी नाराजगी है। अनुपमा सिंह गैर – खतियानी, गैर – झारखंडी और बाहरी होने कि वजह से कुड़मी और आदिवासी समुदाय में भी आक्रोश है कोयलांचल में भाषा और खतियान आंदोलन की शुरुआत हुई थी और लोकसभा चुनाव में इसका असर भी दिखेगा। दूसरी तरफ बीजेपी ने ढुल्लो महतो को धनबाद लोकसभा से प्रत्याशी बनाया है जिन पर कई अपराधिक मामले दर्ज है, दूसरी तरफ ढुल्लो महतो कुड़मी नहीं है वे तेली समाज से आते है।

पसमांदा समुदाय को जयराम कुमार महतो की पार्टी JLKM को क्यों समर्थन करना चाहिए ?

  1. पसमांदा समुदाय को धनबाद लोकसभा मे टिकट देकर राजनीतिक हिस्सेदारी दी है।
  2. JLKM भाषा – खतियान, स्थानीय नीति, नियोजन नीति और उद्योग नीति की लड़ाई लड़ रही है पसमांदा समुदाय भी इन मुद्दों से प्रभावित है।
  3. JLKM एक सेक्युकर राजनीतिक दल है, सांप्रदायिक राजनीति और पूंजीवाद का घोर विरोधी है।
  4. JLKM ने अपने संगठन में पसमांदा समुदाय के नौजवानों को पार्टी में अहम पदों पर बिठाया है।
  5. JLKM को वोट देकर आजसू को गिरिडीह में और बीजेपी को धनबाद में हराया भी जा सकता है और इंडिया गठबंधन साथ साथ सबक भी सिखाया जा सकता है।
  6. जयराम कुमार महतो खुद पिछड़े OBC वर्ग से आते है उसी तरह पसमांदा समुदाय भी OBC वर्ग से आते है हमेशा OBC वर्ग के अधिकार को लेकर खड़े होते है।
  7. जयराम कुमार महतो पढ़े – लिखे शिक्षित व्यक्ति है, पसमांदा आंदोलन का खुलकर समर्थन करते है।
  8. JLKM और जयराम कुमार महतो को अगर लोकसभा चुनाव में पसमांदा समुदाय वोट देती है तो विधान सभा चुनाव में इसका काफी असर पड़ेगा।
  9. धनबाद और गिरिडीह लोकसभा चुनाव के परिणाम विधानसभा चुनाव के समीकरण को बदल सकती है इससे पसमांदा समुदाय को विधान सभा चुनाव में अधिक से अधिक हिस्सेदारी मिल सकती है।
  10. जयराम कुमार महतो का लोकसभा चुनाव मे जितना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे JLKM पार्टी स्थापित हो जायेगी, गैर – खतियानी, गैर – झारखंडी, बाहरी नेताओं की राजनीति झारखंड में मुश्किल हो जाएगी, और इससे पसमांदा तबकों के नेताओं को स्पेस मिलेगा। बाहरी नेता अक्सर हिंदू – मुस्लिम साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देते है, JLKM के मजबूत होने से ये चीजें कमजोर होगी।

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