
उपेक्षित और ठुकराए गए लोगों के आंसू
पोंछना ही सबसे बड़ा साहित्यकर्म है।
— शरतचंद्र चट्टोपाध्याय
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की यह पंक्ति साहित्य के वास्तविक उद्देश्य को रेखांकित करती है। उनका मानना था कि लेखन केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि समाज के उपेक्षित और पीड़ित लोगों के दुखों को
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की चुनी हुई पंक्तियाँ
मैंने जीवन को जैसा देखा और भोगा, उसे ही अपनी कलम से पन्नों पर उतार दिया।
विलासिता मनुष्य को कमजोर बनाती है, जबकि संघर्ष उसे मजबूत करता है।
मनुष्य का अहंकार ही उसके पतन का सबसे बड़ा कारण बनता है।
साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसकी अंतरात्मा की पुकार भी है।
जिस समाज में न्याय नहीं, वहाँ मानवता की कल्पना करना भी व्यर्थ है।
अभावों और संघर्षों ने ही मुझे मनुष्य के भीतर छिपे असली दर्द को पहचानना सिखाया।
धर्म और नैतिकता का असली अर्थ दूसरों के दुख को समझना है।
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के बारे में
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय बांग्ला और भारतीय साहित्य के अमर कथाकार थे। उनके उपन्यासों में समाज के उपेक्षित और शोषित वर्ग का यथार्थ चित्रण मिलता है। 'देवदास' और 'चरित्रहीन' जैसी कृतियों ने उन्हें अपार लोकप्रियता दिलाई। पूरा परिचय और सभी विचार: शरतचंद्र चट्टोपाध्याय — लेखक कोश।
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