
जो लोग डरते हैं, वे जीते-जी मर जाते हैं,
हिम्मत ही असली इंसान का गहना है।
— भवानी प्रसाद मिश्र
भवानी प्रसाद मिश्र की यह पंक्ति मनुष्य को भय से मुक्त होकर जीने का संदेश देती है। कवि का मानना है कि जो व्यक्ति डर के साए में जीता है, वह अपनी जीवंतता खो देता है और
भवानी प्रसाद मिश्र की चुनी हुई पंक्तियाँ
प्रेम कोई दिखावा नहीं, यह तो आत्मा की वह शांति है जो चुपचाप बहती है।
सहज बात को सीधे शब्दों में कहना उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी।
गांधीजी के विचारों को उन्होंने अपनी कविता की अंतरात्मा बनाया।
मौत के मुंह में भी जिंदगी गाई जा सकती है, अगर हौसला बुलंद हो।
बहुत बड़ा न सही, मैं एक छोटा पैगंबर हूँ, जिसे सच बोलने की सजा मिली है।
गीत बेचता हूँ, मैं गीत बेचता हूँ।
अपने मन का मीत बेचता हूँ।
अपने मन का मीत बेचता हूँ।
जीप पर सवार इल्लियाँ और भ्रष्टाचार पर उनका व्यंग्य समाज की सच्चाई को उजागर करता है।
भवानी प्रसाद मिश्र के बारे में
भवानी प्रसाद मिश्र (1913–1985) हिंदी के एक प्रमुख कवि और गांधीवादी विचारक थे। उनकी कविता में सहजता, सादगी और मानवीय करुणा की गहरी छाप मिलती है। उन्हें 'दूसरा सप्तक' के प्रतिष्ठित कवियों में गिना जाता है। पूरा परिचय और सभी विचार: भवानी प्रसाद मिश्र — लेखक कोश।
ये भी पढ़ें
काव्यअब्राहम लिंकन: मैं धीमा चलता हूँ, लेकिन मैंमैं धीमा चलता हूँ, लेकिन मैं कभी भी पीछे नहीं हटता। — अब्राहम लिंकन26 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यमैथिलीशरण गुप्त: संस्कृति हमारी पहचान है, एकता ही हमारीसंस्कृति हमारी पहचान है, एकता ही हमारी शान है, इस पर हमें पूरा अभिमान है। — मैथिलीशरण गुप्त21 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यशरतचंद्र चट्टोपाध्याय: उपेक्षित और ठुकराए गए लोगों के आंसूउपेक्षित और ठुकराए गए लोगों के आंसू पोंछना ही सबसे बड़ा साहित्यकर्म है। — शरतचंद्र चट्टोपाध्याय17 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यसंत रविदास: प्रभु जी तुम मोती हम धागा,प्रभु जी तुम मोती हम धागा, जैसे सोनही मिलत सुहागा। — संत रविदास29 Sep 2026 पढ़ें →