
साहस सभी मानवीय गुणों में पहला गुण है, क्योंकि
यही वह गुण है जो अन्य गुणों को संभव बनाता है।
— अरस्तू
यूनानी दार्शनिक अरस्तू की यह प्रसिद्ध पंक्ति मनुष्य के चरित्र निर्माण में ‘साहस’ को सबसे सर्वोच्च स्थान देती है। उनके अनुसार, साहस केवल युद्ध के मैदान में वीरता दिखाने का नाम नहीं है, बल्कि यह वह आंतरिक शक्ति है जो सच्चाई के मार्ग पर चलने, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और जीवन की कठिनाइयों का डटकर मुकाबला करने की प्रेरणा देती है। जब व्यक्ति में भय पर विजय पाने का साहस होता है, तभी उसके भीतर ईमानदारी, करुणा, न्याय और बुद्धिमत्ता जैसे अन्य मानवीय गुण विकसित और सुरक्षित रह पाते हैं। यदि मनुष्य डरपोक है, तो उसके अन्य अच्छे गुण भी परिस्थितियों के दबाव मेंजल्द ही दम तोड़ देते हैं। इसलिए, अरस्तू ने साहस को सभी गुणों का आधार और संरक्षक माना है।
आज के समय में, जहाँ भ्रष्टाचार, अन्याय और अनिश्चितता का बोलबाला है, अरस्तू का यह कथन और अधिक प्रासंगिक हो गया है। आज सच बोलने के लिए, भीड़ से अलग अपनी मौलिक राय रखने के लिए और अपनी विफलताओं से सीखकर फिर से उठ खड़े होने के लिए असाधारण साहस की आवश्यकता होती है। यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि केवल कोमल भावनाएँ या अच्छे विचार होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आचरण में उतारने के लिए अडिग साहस की भी उतनी ही जरूरत है। आधुनिक जीवन की हर चुनौती का सामना करने और एक बेहतर इंसान बनने के लिए यह विचार आज भी हमारा सबसे बड़ा मार्गदर्शक है।
अरस्तू की चुनी हुई पंक्तियाँ
अरस्तू के बारे में
अरस्तू प्राचीन यूनान के महान दार्शनिक और वैज्ञानिक थे, जिनका जन्म मैसेडोनिया के स्टेगीरा में हुआ था। वे प्लेटो के प्रिय शिष्य और सिकंदर महान के गुरु थे। पश्चिमी दर्शनशास्त्र और विज्ञान पर उनका प्रभाव अत्यंत गहरा और दूरगामी रहा है। पूरा परिचय और सभी विचार: अरस्तू — लेखक कोश।
ये भी पढ़ें
काव्यहजारीप्रसाद द्विवेदी: जो लोग इतिहास की धारा को मोड़नाजो लोग इतिहास की धारा को मोड़ना चाहते हैं, वे खुद बह जाते हैं। — हजारीप्रसाद द्विवेदी14 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यसंत ज्ञानेश्वर: अवघे विश्वची माझे घर, ऐसा मतिचाअवघे विश्वची माझे घर, ऐसा मतिचा फेरा, सुख-दुःखाचा न वाटे वरा। — संत ज्ञानेश्वर26 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यमीर तक़ी मीर: मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसोंमत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं — मीर तक़ी मीर12 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यभवानी प्रसाद मिश्र: जो लोग डरते हैं, वे जीते-जी मर जाते हैं,जो लोग डरते हैं, वे जीते-जी मर जाते हैं, हिम्मत ही असली इंसान का गहना है। — भवानी प्रसाद मिश्र4 Oct 2026 पढ़ें →