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26 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
संत ज्ञानेश्वर: अवघे विश्वची माझे घर, ऐसा मतिचा
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

अवघे विश्वची माझे घर, ऐसा मतिचा

फेरा, सुख-दुःखाचा न वाटे वरा।

— संत ज्ञानेश्वर

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संत ज्ञानेश्वर की चुनी हुई पंक्तियाँ

चित्तशुद्धीविना भजन ते व्यर्थ, प्रेमाविना भक्तीचा नसे काही परमार्थ।
देह देवाचे मंदिर, आत आत्मा परमेश्वर, मानवाचा मानवाशी प्रेमाचाच व्यवहारी घर।
साधूचे वर्तन असे अमृतासमान, जे दुःखीतांचे दुःख वाटे आणि देई नवसंजीवन।
अमृताते पैं जिंकावें, ऐसी अक्षरांचे प्रतिपावे
बोलू जैसी विठ्ठले, साचोकारें

अहंकार जिरल्याविना न मिळे हरी, हाच अनुभवाचा साचा वारकरी संप्रदायाधारी।
जे का रंजले गांवाजले, त्यासि म्हणे जो आपुलीया
तोचि साधू ओळखावा, देव तेथेंचि जाणावा
गुरुकृपेविना न मिळे ज्ञान, सद्गुरूपदीच अर्पिले पाहिजे आपले सर्वस्व प्राण।

संत ज्ञानेश्वर के बारे में

संत ज्ञानेश्वर तेरहवीं सदी के महान वारकरी संत, कवि और दार्शनिक थे। उन्होंने अत्यंत अल्प आयु में ही मराठी भाषा में भगवद्गीता का प्रामाणिक टीकाग्रंथ 'ज्ञानेश्वरी' लिखकर भक्ति आंदोलन को अभूतपूर्व दिशा दी। पूरा परिचय और सभी विचार: संत ज्ञानेश्वर — लेखक कोश।

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लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 26 September 2026 · अपडेट: 26 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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