ववाह वाह यारहिंदी में जानकारी · पूरे भारत के लिए
मेनू
WhatsApp चैनल
5 Oct 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
मज़रूह सुल्तानपुरी: वक़्त के साथ बदल जाते हैं चेहरों के रंग,
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

वक़्त के साथ बदल जाते हैं चेहरों के रंग,

आईने से भी नज़र फेर ली जाती है यहाँ।

— मज़रूह सुल्तानपुरी

के दौर में, जहाँ रिश्ते और भावनाएँ मतलब की बुनियाद पर टिके हैं, यह शेर बेहद प्रासंगिक है। सोशल मीडिया और दिखावे की इस दुनिया में लोग पल-पल अपने चेहरे और मुखौटे बदलते रहते

मज़रूह सुल्तानपुरी की चुनी हुई पंक्तियाँ

प्यार के नाम पे दुनिया में जो रुस्वा हुए, हमने हर दर्द को चुपचाप गले से लगाया।
सच की राहों पे जो काँटे भी बिछाए किसी ने, हमने हर ज़ख्म को फूलों की तरह पाला है।
जिंदगी है तो नए ख्वाब भी देखे जाएंगे
राख से फिर कोई चिंगारी निकल आएगी।
ऐ शोख़-ए-नज़र हम से न आ आँखें चुराओ, जो बात है वो साफ़ ज़ुबाँ पर भी लाओ।
दिल की बात लबों पर आई न कभी
हमने हालात की हर चोट सही, मुस्कुराए भी।
राह में मुश्किलें कितनी ही क्यों न आ जाएँ, हर कदम सच की तरफ़ आज बढ़ाना होगा।
दोस्ती का ये सिला हमने दिया है खुद को, हर शिकस्ता दिल को सीने से लगाया हमने।

मज़रूह सुल्तानपुरी के बारे में

मज़रूह सुल्तानपुरी (1919–2000) हिंदी सिनेमा और उर्दू अदब के महान गीतकार और शायर थे। उन्होंने अपनी क्रांतिकारी शायरी और रूमानी गीतों से भारतीय संस्कृति और संगीत जगत को समृद्ध किया। पूरा परिचय और सभी विचार: मज़रूह सुल्तानपुरी — लेखक कोश।

विज्ञापन · Advertisement
शेयर:FacebookTelegram

ये भी पढ़ें

awaraalfaz
लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 5 October 2026 · अपडेट: 5 October 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *