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12 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
मीर तक़ी मीर: मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों

तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं

— मीर तक़ी मीर

उर्दू के महान शायर मीर तकी मीर की यह प्रसिद्ध पंक्ति इंसान के वजूद और उसकी कीमत को बेहद खूबसूरत अंदाज में बयान करती है। इसका सीधा अर्थ है कि किसी साधारण या आम इंसान को कमजोर या महत्वहीन मत समझिए। आसमान यानी ब्रह्मांड को सदियों तक चक्कर काटने और लंबी प्रक्रिया से गुजरने के बाद कहीं जाकर इस मिट्टी के परदे से कोई इंसान पैदा होता है। मीर साहब का मिजाज हमेशा से दर्द, संवेदनशीलता, और इंसानी जिंदगी की गहराई को तलाशने का रहा है। उनकी शायरी में उदासी के साथ-साथ ब्रह्मांडीय सत्य और जीवन के प्रति एक गहरा सम्मान झलकता है। वे हर जीव और हर व्यक्ति के वजूद को इस कायनात की एक अनमोल रचना के रूप में देखते हैं, जो यों ही नहीं बन जाती।

आज के आधुनिक और यंत्रवत दौर में, जहां इंसान की पहचान केवल उसकी सफलता, धन या उपयोगिता से की जाती है और मानवीय मूल्यों का पतन हो रहा है, यह शेर हमें एक गहरी सीख देता है। यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि हर मनुष्य अपने मूल रूप में ब्रह्मांड की एक दुर्लभ और अद्भुत रचना है, जिसका जीवन बेहद कीमती है। यह आज के समय में हमें हर व्यक्ति का सम्मान करने, उसकी गरिमा को समझने और जीवन के प्रति एक संवेदनशील नजरिया अपनाने की प्रेरणा देती है, चाहे वह इंसान कितना ही साधारण क्यों न दिखाई दे।

मीर तक़ी मीर की चुनी हुई पंक्तियाँ

किस से محرومی-ए-क़िस्मत की शिकायत कीजै
हम ने चाहा था कि मर जाएँ सो वो भी न हुआ
आँख मेरी बला से बंद रहे
दिल तो तेरी तरफ़ लगा न रहे
पत्ती-पत्ती बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
उल्फत में ये मक़ाम भी देखे कि रो पड़े
जब ज़िक्र आया तेरा तिरे नाम पर पड़े
दिल की वीरानी का क्या पूछिए
इस नगर में बस इक बाम ओ दर रह गया
मुहमद तो हर एक शय पे है छाई हुई मगर
वो आँख जो कि दीद के क़ाबिल नहीं रही
कौन जाने है कि याँ किस की हुकूमत है 'मीर'
सब से हम खूब से हैं खूब-तर आए हुए

मीर तक़ी मीर के बारे में

मीर तकी मीर (1723-1810) उर्दू के महानतम और शुरुआती शायरों में एक माने जाते हैं। उन्हें "खुदा-ए-सुखन" यानी शायरी का खुदा कहा जाता है। उन्होंने अपनी गजलों में दर्द, उदासी और मुहब्बत को बेहद सादगी और गहराई के साथ बयान किया है। पूरा परिचय और सभी विचार: मीर तक़ी मीर — लेखक कोश

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लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 12 September 2026 · अपडेट: 12 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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