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2 Oct 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
सुन त्ज़ू: यदि शत्रु बलवान है, तो उसके लिए तैयारी
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

यदि शत्रु बलवान है, तो उसके लिए तैयारी

करो; यदि वह क्रोधित है, तो उसे भड़काओ।

— सुन त्ज़ू

प्राचीन चीनी रणनीतिकार सुन त्ज़ू की यह पंक्ति युद्ध और कूटनीति के सबसे बड़े सत्यों को उजागर करती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि आपका विरोधी आपसे अधिक ताकतवर है, तो उससे सीधे टकराने के बजाय अपनी तैयारी मजबूत करें और चतुराई से काम लें। वहीं, यदि वह आसानी से गुस्से में आ जाता है, तो उसकी इस कमजोरी का फायदा उठाकर उसे और अधिक उत्तेजित करें ताकि वह क्रोध में आकर गलत निर्णय ले और अपनी ही हार तय कर बैठे। इस कथन में एक गंभीर, व्यावहारिक और यथार्थवादी रणनीतिकार का मिजाज झलकता है, जो भावनाओं में बहने के बजाय ठंडे दिमाग से परिस्थितियों का आकलन करने में विश्वास रखता है। यहाँ भावनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से बुद्धि, संयम और दूरदर्शिता का खेल है, जहाँ शब्दों और चालों से दुश्मन को चित किया जाता है।

आज के आधुनिक और प्रतिस्पर्धी दौर में यह पंक्ति कॉर्पोरेट जगत, राजनीतिक रणनीतियों और व्यक्तिगत जीवन के संघर्षों पर उतनी ही सटीक बैठती है जितनी कि युद्ध के मैदान में। जब हम जीवन में किसी शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी या कठिन परिस्थिति का सामना करते हैं, तो आवेगी होने के बजाय योजनाबद्ध तरीके से खुद को तैयार करना ही बुद्धिमानी है। इसी प्रकार, दफ्तर की राजनीति हो या व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा, कई बार विरोधी पक्ष का अहंकार और क्रोध ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है। इस उक्ति का समकालीन संदर्भ यही सिखाता है कि हमें क्रोध या जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए, बल्कि अपने विवेक का उपयोग करते हुए विरोधी की कमजोरियों को अपनी ताकत में बदलना चाहिए। यही सामरिक कौशल आज की जटिल दुनिया में सफलता की कुंजी है।

सुन त्ज़ू की चुनी हुई पंक्तियाँ

जो पहले युद्ध के मैदान में पहुँचकर शत्रु की प्रतीक्षा करता है, वह विश्राम करता है और मजबूत होता है।
बिना रणनीति के काम करना हार का शोर है, और बिना योजना के चलना सबसे धीमी राह है।
जिस प्रकार जल का कोई स्थिर आकार नहीं होता, उसी प्रकार युद्ध में कोई निश्चित स्थिति नहीं होती।
एक सच्चा नेता भय से नहीं, बल्कि अपने आदर, न्याय और करुणा से वफादारी पाता है।
जो स्वयं सतर्क रहता है और असावधान शत्रु का इंतजार करता है, वही विजयी होता है।
वही विजयी होता है जो जानता है कि कब लड़ना है और कब नहीं लड़ना है।
यदि आप अपने शत्रुओं को और स्वयं को जानते हैं, तो सौ युद्धों के परिणामों से भयभीत न हों।

सुन त्ज़ू के बारे में

सुन त्ज़ू प्राचीन चीन के महान सैन्य रणनीतिकार, दार्शनिक और सेनापति थे। उनकी विश्वप्रसिद्ध कृति 'द आर्ट ऑफ़ वॉर' आज भी कूटनीति, प्रबंधन और युद्धकला का आधार मानी जाती है। पूरा परिचय और सभी विचार: सुन त्ज़ू — लेखक कोश।

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लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 2 October 2026 · अपडेट: 2 October 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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