
रणनीतिकार
सुन त्ज़ू
ईसा पूर्व 544–496
सुन त्ज़ू प्राचीन चीन के महान सैन्य रणनीतिकार, दार्शनिक और सेनापति थे। उनकी विश्वप्रसिद्ध कृति 'द आर्ट ऑफ़ वॉर' आज भी कूटनीति, प्रबंधन और युद्धकला का आधार मानी जाती है।
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सुन त्ज़ू का जन्म ईसा पूर्व 544 के आसपास चीन के वसंत और शरद ऋतु काल में हुआ था। वे वू राज्य के एक प्रतिष्ठित सेनापति और रणनीतिकार थे, जिन्होंने अपनी सामरिक सूझबूझ से कई विजय दिलाईं। उनकी इकलौती और अमर कृति 'द आर्ट ऑफ़ वॉर' (युद्धकला) तेरह अध्यायों में विभाजित है। इस ग्रंथ में उन्होंने सिखाया कि वास्तविक विजय बिना युद्ध लड़े दुश्मन को हराने में है। उनका यह दार्शनिक ग्रंथ आज केवल सेनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवसाय, खेल और जीवन प्रबंधन में भी प्रासंगिक है।
सुन त्ज़ू के अनमोल विचार
यदि आप अपने शत्रुओं को और स्वयं को जानते हैं, तो सौ युद्धों के परिणामों से भयभीत न हों।
पानी का बहाव जिस प्रकार ऊँचे स्थानों से बचकर नीचे की ओर जाता है, वैसे ही सेना को भी ताकत से बचकर कमजोरी पर वार करना चाहिए।
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गति ही युद्ध का सार है, शत्रु की अकुशलता का लाभ उठाओ और अप्रत्याशित मार्गों से आगे बढ़ो।
जिस प्रकार जल का कोई स्थिर आकार नहीं होता, उसी प्रकार युद्ध में कोई निश्चित स्थिति नहीं होती।
क्रोध को फिर से प्रसन्नता में बदला जा सकता है, और झुंझलाहट को संतोष में बदला जा सकता है।
जो पहले युद्ध के मैदान में पहुँचकर शत्रु की प्रतीक्षा करता है, वह विश्राम करता है और मजबूत होता है।
सैनिकों के साथ अपने बच्चों जैसा व्यवहार करो, वे तुम्हारे साथ सबसे गहरी घाटियों में भी जाने को तैयार रहेंगे।
आक्रमण करो वहाँ जहाँ शत्रु रक्षा न कर रहा हो, और प्रकट होओ वहाँ जिसकी उसने उम्मीद न की हो।
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