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तिरुवल्लुवर
तमिल संत कवि
तिरुवल्लुवर
लगभग 31 ईसा पूर्व
तिरुवल्लुवर प्राचीन तमिलनाडु के महान संत, कवि और दार्शनिक थे। उन्होंने अमर ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' की रचना की, जो तमिल साहित्य का सिरमौर माना जाता है। उन्हें संपूर्ण दक्षिण भारत में अत्यंत आदरणीय और पूजनीय स्थान प्राप्त है।
तिरुवल्लुवर का जन्म लगभग 31 ईसा पूर्व तमिलनाडु के मायलाप्पुर में हुआ था। उनकी प्रसिद्ध कृति 'तिरुक्कुरल' में 1330 कुडल (दोहे) हैं, जो धर्म, अर्थ और काम पर आधारित हैं। यह ग्रंथ बिना किसी जाति, पंथ या धर्म के भेदभाव के सार्वभौमिक मानव मूल्यों की शिक्षा देता है। इसे तमिल संस्कृति का पंचम वेद और जीवन दर्शन का आधार माना जाता है। उनके सम्मान में ही आधुनिक तमिल कैलेंडर (वल्लुवर वर्ष) की गणना की जाती है। कन्याकुमारी में उनकी 133 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित है।
तिरुवल्लुवर के अनमोल विचार
ज्ञान ही मनुष्य की असली आंख है, अज्ञानी लोग केवल अंधे चेहरे वाले होते हैं।