हिंदी में सुविचार, शायरी, शिक्षा, पैसा और बिज़नेस की जानकारी
हजारीप्रसाद द्विवेदी
निबंधकार
हजारीप्रसाद द्विवेदी
1907–1979
हजारीप्रसाद द्विवेदी हिंदी के शीर्षस्थ निबंधकार, उपन्यासकार और आलोचक थे। उनका जन्म 1907 में बलिया में हुआ था और 1979 में उनका निधन हुआ। उन्होंने अपनी गहरी सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक दृष्टि से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया।
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी हिंदी के मर्मज्ञ विद्वान, उपन्यासकार, आलोचक और निबंधकार थे। उनका जन्म 1907 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के आर्तकोरा गाँव में हुआ था। उन्होंने 'अशोक के फूल', 'कुटज' और 'कल्पलता' जैसे प्रसिद्ध निबंधों की रचना की। वे शांतिनिकेतन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय में अध्यापन से जुड़े रहे। 'बाणभट्ट की आत्मकथा' और 'पुनर्नवा' उनके ऐतिहासिक महत्व के प्रसिद्ध उपन्यास हैं। भारत सरकार ने उन्हें 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया और 1979 में उनका देहांत हो गया।
हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनमोल विचार
मनुष्य ही बड़ी चीज़ है, बाकी सब चीजें उसके काम के लिए हैं।