हिंदी में सुविचार, शायरी, शिक्षा, पैसा और बिज़नेस की जानकारी
नागार्जुन
जनकवि
नागार्जुन
1911–1998
नागार्जुन आधुनिक हिंदी और मैथिली साहित्य के महान कवि एवं उपन्यासकार थे। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था और वे 'यात्री' उपनाम से भी लिखते थे। जनजीवन से उनका गहरा जुड़ाव होने के कारण उन्हें 'जनकवि' के रूप में जाना जाता है।
नागार्जुन का जन्म 30 जून 1911 को बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में हुआ था। उन्होंने अपनी रचनाओं में आम आदमी के संघर्ष, किसानों के जीवन और सामाजिक विसंगतियों को पूरी बेबाकी से उभारा। वे राहुल सांकृत्यायन से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म की तरफ झुके और बाद में प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े। 'मैथिलीशरण गुप्त' के बाद उन्हें जनचेतना का सबसे बड़ा कवि माना जाता है। उनकी रचनाओं में व्यंग्य की पैनी धार और लोकसंस्कृति की सोंधी महक मिलती है। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और भारत भारती सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
नागार्जुन के अनमोल विचार
बादल को घिरते देखा है, मलयज की शीत लियों पर
चकित कंठ में चंचु प्रगति का मधुर स्वर देखा है।