विचार संग्रहमेहनत पर अनमोल विचार
महापुरुषों, कवियों और लेखकों के 99 विचार — कॉपी कीजिए, शेयर कीजिए।
मेहनतकशों के पसीने की बूंदों से ही इस देश की असल नींव मजबूत होती है।
मनुष्य की महत्ता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म और संघर्ष से तय होती है।
मेहनत करने वाले हाथों को उनका वाजिब हक न मिलना इस समाज का सबसे बड़ा कलंक है।
पापकर्म से बड़ा पाप वह दृष्टि है जो मनुष्य को अपराधी मान लेती है।
मेहनत केवल पेट भरने का साधन नहीं, वह मनुष्य के आंतरिक विकास और साधना की प्रक्रिया है।
समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता, कर्म ही मनुष्य की असली पहचान है।
मेहनत की लकीरों से ही इंसान अपनी किस्मत की तकदीर बदलता है।
पुरुषार्थ और निरंतर परिश्रम के बिना भाग्य का दरवाजा कभी नहीं खुलता।
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उपेक्षित और ठुकराए गए लोगों के आंसू पोंछना ही सबसे बड़ा साहित्यकर्म है।
हर बड़ी सफलता के पीछे अनगिनत छोटे लोगों की मेहनत छिपी होती है, जिन्हें कभी अखबारों में जगह नहीं मिलती।
उन्होंने अपनी रचनाओं में किसानों की पीड़ा और उनकी मेहनत का बहुत ही मार्मिक और यथार्थ चित्रण किया।
मेहनत करने वाला इंसान कभी भूखा या लाचार नहीं रहता।
मेहनत का पसीना जो माथे पर सजाता है, वही इंसान इस दुनिया में मुकद्दर बनाता है।
मेहनत की स्याही से जो किस्मत लिखते हैं, उनके पन्नों पर कभी अंधेरा नहीं होता।
मेहनत के पसीने से जो सींचा जाए, वही पौधा चमन में गुल खिलाता है।
फितरत के तकाजों से बगावत नहीं मुमकिन, इंसान की तकदीर में है मेहनत-ए-पैहम।
न हो नाउम्मीद इक दिन तेरा भी वक्त आएगा, ज़रा हिम्मत तो रख ऐ दिल ज़रा मेहनत तो कर।
जो लोग कठिन परिश्रम करते हैं, भाग्य भी अंततः उन्हीं का साथ देता है।
चित्तशुद्धी विना कर्म सगळे व्यर्थ आहे, भक्तीमध्ये कपटास कोणतेही स्थान नाही।
कर्माविना नाही सुटका कोणा, निष्काम कर्मच साचे मोक्षाचे पैलतीर जाणा।
कृताकृत कर्मों के बंधनों से मुक्त होकर ही मनुष्य ईश्वर को पा सकता है।
देहि शिवा बर मोहि इहै शुभ कर्मन ते कबहूं न टरों।
सच्चे सिख वही हैं जो अपनी मेहनत की कमाई से खाते हैं और जरूरतमंदों को बाँटकर जीते हैं।
सत श्रम सांचा मानिए, आलस मेटो दूर
दादू मेहनत जो करै, पावै फल जरूर
जब तक कर्ता का भाव है, तब तक कर्म का बंधन और उसका फल भी है।
जब तक भीतर कपट है, तब तक बाहरी सत्संग और धर्म-कर्म सब व्यर्थ हैं।
यदि हम अपने दैनिक जीवन में कृष्ण को केंद्र मान लें, तो समस्त कर्म अपने आप पवित्र हो जाते हैं।
मातृभूमि की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म और कर्म है।
कर्म ही वह मार्ग है जो मनुष्य को उसके सपनों और आदर्शों की मंजिल तक पहुंचाता है।
मेहनत और निष्ठा से किया गया हर प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता, वह भविष्य की नींव बनता है।
मनुष्य अपने जन्म से नहीं, बल्कि अपने अच्छे कर्मों और विचारों से महान बनता है।
मनुष्य की महानता उसके जन्म या कुल से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और परोपकारी स्वभाव से तय होती है।
मेहनत और लगन से किया गया हर सामाजिक कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता।
मेहनत हमारी, पसीना हमारा, तो इस धरती की फसल पर भी सिर्फ हमारा हक है।
मेहनत करने वाले के पसीने पर पलने वाले परजीवियों का खात्मा ही न्यायसंगत समाज की नींव है।
मदिरा और कुरीतियों का त्याग करो, मन और कर्म से पवित्र होकर ही हम अन्याय के खिलाफ खड़े हो सकते हैं।
कड़ी मेहनत ही हमारी धरती को समृद्ध बनाती है, आलस्य छोड़ो और अपनी माटी को हरा-भरा बनाओ।
किसान ही इस देश की रीढ़ हैं और उन्हीं के परिश्रम पर पूरा समाज टिका हुआ है।
मेहनत करने वाले को उसका हक मिलना ही चाहिए, यही सच्चा धर्म और समाजवाद है।
अवसर अधिकांश लोगों से इसलिए चूक जाते हैं क्योंकि यह चोले पहने मेहनत की तरह दिखता है।
जो लोग हर बात में भाग्य को दोष देते हैं, वे असल में अपनी मेहनत से भाग रहे होते हैं।
अनवरत परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण ही किसी भी सफलता की असली कीमत है।
बिना सोचे-समझे पढ़ना व्यर्थ की मेहनत है, और बिना पढ़े केवल सोचना बेहद खतरनाक है।
श्रेष्ठ मनुष्य अपनी वाणी में अत्यंत विनम्र होता है, किंतु कर्म करने में सबसे आगे रहता है।
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसके लिए निरंतर परिश्रम की आवश्यकता होती है।
शब्दों से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आपके कर्म क्या कहते हैं।
हर सफल व्यक्ति के पीछे उसकी अथक मेहनत और कभी न हार मानने की जिद्द होती है।
इंसान का असली कद उसकी लंबाई से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से मापा जाता है।
मेहनत और पसीने से सींची गई रोटी का स्वाद दुनिया के सबसे महंगे पकवानों से भी बढ़कर होता है।
मेहनत का फल मीठा होता, जग में कोई न भूखा सोता।
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श्रमिक वर्ग की मेहनत से ही यह दुनिया चलती है, इसलिए उन्हें उनका हक मिलना ही चाहिए।
मेहनत के बिना दुनिया में किसी को भी कभी कोई महान उपलब्धि हासिल नहीं होती।
पसीना बहाकर कमाने वाले मजदूरों की मेहनत ही इस पूरी दुनिया को चलाती है।
किसानों और मजदूरों की मेहनत पर यह समाज टिका है, इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म है।
मेहनत करने वाले मजदूर और किसान ही इस पूरे संसार के असली निर्माता और आधार हैं।
जाति, वंश या कुल से कोई महान नहीं बनता, इंसान अपने कर्मों और विचारों से महान बनता है।
मेहनतकशों के पसीने की सही कीमत और उनके श्रम का सम्मान ही सच्ची न्याय व्यवस्था है।
ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से किया गया कठिन परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता, उसका परिणाम समाज को दिशा देता है।
हमें अपने अतीत से प्रेरणा लेनी चाहिए लेकिन भविष्य का निर्माण वर्तमान के कर्मों से करना होगा।
मेहनत वह महक है जो असफलता की हर कड़वाहट को मीठा कर देती है।
मेहनत का फल और वतन के लिए बहाया गया खून कभी बेकार नहीं जाता, उसका असर पूरी दुनिया देखती है।
आज की मेहनत और बलिदान ही कल के स्वतंत्र और समृद्ध भारत की नींव रखेंगे।
अतीत की महानता से प्रेरणा लो, वर्तमान में कड़ी मेहनत करो और भविष्य का निर्माण करो।
मेहनत ऐसी खामोशी से करो कि तुम्हारी सफलता ही तुम्हारा सबसे बड़ा परिचय बन जाए।
बिना पसीने की बूंदों और अटूट मेहनत के कोई भी महान मंजिल नहीं पाई जा सकती।
मेहनत
कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास ही मनुष्य के जीवन में सफलता के द्वार खोलते हैं।
मनुष्य की महानता उसके पद या संपत्ति में नहीं, बल्कि उसके विचारों और कर्मों में है।
हमें अतीत की महानता पर गर्व होना चाहिए, लेकिन भविष्य का निर्माण अपनी वर्तमान मेहनत से करना चाहिए।
धर्म का सार प्रेम, करुणा और बंधुत्व में निहित है, न कि कर्मकांडों में।
एकाग्रता और निरंतर मेहनत से ही जीवन में बड़े लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है।
विचार जब तक कर्म न बने, तब तक वह केवल एक बोझ है।
जग का जीवन ही श्रम-बल है, कर्मवीर का यह संबल है, पसीना बन बहती धारा, जीवन का पावन बल है।
हिम्मत कभी न हारो साथी, राहों में हो कितनी रात, अपनी ही मेहनत के बल पर, लिख दो तुम अपनी ही बात।
केवल मनोरंजन न कवि का कर्म होना चाहिए, उसमें उचित उपदेश का मर्म होना चाहिए।
मातृभूमि की सेवा से बढ़कर नहीं कोई धर्म, यही है हर भारतीय का सबसे पहला कर्म।
मेहनत की स्याही से जो अपनी तकदीर लिखते हैं, वे लोग इस दुनिया में कभी नहीं दीन-हीन दिखते हैं।
समाज में न्याय मिले सबको, यह सबसे बड़ा धर्म है, अन्याय सहना और करना दोनों ही महाकर्म-धर्म है।
बिना पुरुषार्थ के भाग्य भी साथ नहीं देता, कर्म ही प्रधान है।
भड्डरी कहै सुनै सब कोई, बिना मेहनत कुछ पावै ना कोई।
असफलता से डरना कायरता है, गिरकर दोबारा उठना और आगे बढ़ना ही एक सच्चे कर्मयोगी की पहचान है।
सच्ची मेहनत वही है जो पसीने से सींची जाए और जिसका परिणाम समाज को मिले।
कर्म का मार्ग ही जीवन की सच्ची सफलता की इकलौती कुंजी है।
पुरुष ने जिसे कर्मठता समझा, नारी ने उसे अपनी करुणा और त्याग से अधिक सार्थक और सुंदर बना दिया।
सौंदर्य केवल बाहरी आवरण नहीं, बल्कि वह पवित्र आंतरिक प्रकाश है जो मनुष्य के हर कर्म में झलकता है।
महान कार्य करने के लिए पहले उस पर विश्वास करना और फिर लगातार मेहनत करना जरूरी है।
जिस प्रकार एक फूल की सुगंध हवा की दिशा में फैलती है, वैसे ही व्यक्ति के अच्छे कर्मों का यश चारों दिशाओं में फैलता है।
आलस्य मनुष्य के शरीर में छिपा सबसे बड़ा शत्रु है, जो बिना परिश्रम के कभी सफलता प्राप्त नहीं होने देता।
राष्ट्र के प्रति समर्पण और कड़ी मेहनत से ही एक विकसित भारत का सपना सच हो सकता है।
आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत ही असफलता नामक बीमारी को हमेशा के लिए हराने की अचूक दवा है।
अपने भाग्य पर भरोसा मत करो, अपनी ताकत और कर्म पर विश्वास रखो।
मेहनत ही वह चाबी है जो सफलता के हर बंद दरवाजे को खोलकर नई मंजिलों तक पहुँचाती है।
बिना कार्य के ज्ञान और बिना विवेक के कर्म दोनों ही समाज के लिए विनाशकारी होते हैं।
प्रसन्नता तब मिलती है जब आपके विचार, आपके शब्द और आपके कर्म पूरी तरह से एक साथ हों।
मनुष्य का मूल्य उसके कपड़ों या धन से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और कर्मों से आंका जाता है।
कर्म ही जीवन का सत्य है, पसीना बहाकर ही मनुष्य अपना भाग्य लिखता है।
समय की धारा किसी के लिए नहीं रुकती, कर्म ही मनुष्य का सच्चा आभूषण है।
मनुष्य की महानता उसके कर्मों से होती है, जन्म या जाति से नहीं।
मेहनत वह कुंजी है जो किस्मत के बंद ताले को भी आसानी से खोल देती है।
कर्म प्रधान विश्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फल चाखा॥
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