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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
छायावादी कवि
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
1896–1961
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (1896–1961) हिंदी छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने कविता को छंदों की रूढ़ियों से मुक्त कर मुक्त छंद की नींव रखी और जीवनभर संघर्ष किया।
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म बंगाल के महिषादल में हुआ था। वे कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और कथाकार के रूप में हिंदी साहित्य में अमर हो गए। 'जूही की कली' उनकी पहली मुक्त छंद कविता थी जिसने साहित्य जगत में तहलका मचा दिया। 'अनामिका', 'परिमल', 'गीतिका' और 'कुकुरमुत्ता' उनके प्रसिद्ध काव्य संग्रह हैं। महाप्राण निराला ने 'राम की शक्तिपूजा' जैसी उत्कृष्ट रचना लिखकर हिंदी कविता को एक नई ऊँचाई दी। उनका पूरा जीवन वैयक्तिक और साहित्यिक संघर्षों से जूझते हुए मानवता के कल्याण के लिए समर्पित रहा।
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनमोल विचार
दुःख ही जीवन की कथा रही, क्या कहूं आज जो नहीं कही।