विचार संग्रहप्रेम पर अनमोल विचार
महापुरुषों, कवियों और लेखकों के 187 विचार — कॉपी कीजिए, शेयर कीजिए।
प्रेम सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि एक-दूसरे के संघर्ष में साथ खड़े होने की ताकत है।
आज आखाँ वारिस शाह नूं, कितो कबरों बोल। और किताब-ए-इश्क दा कोई अग्ला वक्ता खोल।
प्रेम किसी पहचान का मोहताज नहीं होता, यह तो बस आत्मा का आत्मा से संवाद है।
एक रचनाकार का सबसे बड़ा धर्म सच के साथ खड़े होना और मानवता से प्रेम करना है।
प्यार किसी कानून का मोहताज नहीं होता, यह बगावत है जो दिल से होती है।
डर और संकीर्णता मनुष्य को हिंसक बनाते हैं, जबकि प्रेम और समझदारी ही हमें इंसान बनाए रखते हैं।
प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रश्न सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था से जुड़ा होता है।
विवाह संस्था जब तक प्रेम की कैदी है, तब तक समाज में सच्ची स्वतंत्रता असंभव है।
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प्रेम और आकर्षण किसी के रोके नहीं रुकते, इन्हें सामाजिक बंधनों से मुक्त होना चाहिए।
प्रेम अधिकार नहीं, बल्कि एक निःस्वार्थ और पवित्र समर्पण की अनुभूति है।
परख उपन्यास में जैनेंद्र जी ने नैतिकता और प्रेम के बीच के द्वंद्व को उभारा है।
प्रेम कोई सौदा नहीं है, यह तो वह ऊर्जा है जो व्यक्ति को पूरी तरह से मुक्त कर देती है।
अहम् का विसर्जन ही सच्ची मुक्ति है, इसके बिना प्रेम और करुणा का उदय असंभव है।
वासना में केवल अधिकार की भावना होती है, जबकि प्रेम में पूरी तरह मिट जाने की चाह होती है।
जाति-धर्म की दीवारें तोड़ दो,
प्रेम की गंगा में सब कुछ मोड़ दो।
मैं उस अंबर का तारा हूँ,
जो अंधकार से लड़ने आया प्यारा हूँ।
प्रेम और विद्रोह का मेरा चोला है,
यही मेरा सच्चा बोला है।
प्रेम ही वह शक्ति है जो क्रूरता के पत्थरों को भी पिघला सकती है।
स्वदेश प्रेम मनुष्य के हृदय में उत्पन्न होने वाली सबसे पवित्र और महान भावना है।
जो मनुष्य अपनी मातृभूमि से प्रेम नहीं करता, उसका जीवन पशु के समान व्यर्थ है।
प्रेम और करुणा के बिना हृदय कठोर हो जाता है, और समाज में दरारें पड़ जाती हैं।
प्रेम किसी नियम या बंधन को नहीं मानता, वह केवल हृदय की भाषा समझता है।
मानवीय करुणा और प्रेम के बिना इस संसार की कल्पना करना भी असंभव है।
सच्चा प्रेम त्याग मांगता है, अधिकार जताना प्रेम का स्वभाव नहीं।
प्रेम और करुणा के बिना साहित्य केवल शब्दों का जाल बनकर रह जाता है।
प्रेम कोई दिखावा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में एक-दूसरे का साथ निभाना और भरोसा रखना है।
उनका काव्य भारतीय ग्राम्य संस्कृति, प्रकृति प्रेम और शोषित वर्ग के संघर्ष का अनूठा दस्तावेज है।
"देश हमारा प्यारा भारत, दुनिया में सबसे न्यारा है" जैसी पंक्तियाँ बच्चों और बड़ों में समान रूप से लोकप्रिय हैं।
शमशेर बहादुर सिंह ने उन्हें 'हिन्दोस्तान का वह प्यारा कवि' कहा था जो जन-जन के मन में बसता है।
प्यार वो ताकत है जो नफरत के पहाड़ों को भी पिघला सकती है।
जिंदगी को प्यार करना सीखो, हर पल को जीना सीखो।
प्रेम वही है जो बंधन में भी स्वतंत्रता दे, दिल की हर धड़कन में केवल अपनापन दे।
प्यार की भाषा में कोई सरहद नहीं होती, सच्ची निष्ठा कभी किसी से शर्त नहीं रखती।
प्रेम कोई दिखावा नहीं, यह तो आत्मा की वह शांति है जो चुपचाप बहती है।
ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया, जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया
दिल तोड़ दिया तुमने, अब प्यार न करना हम से, इक बेवफा की याद में रोते हैं हम हरदम से
वो जो मिलते हैं कभी राह में अजनबी बनकर
उम्र भर उनकी मोहब्बत का असर रहता है।
प्यार के नाम पे दुनिया में जो रुस्वा हुए, हमने हर दर्द को चुपचाप गले से लगाया।
मोहब्बत वो जुनून है जो हर हद पार कर जाए
होश में रहने वाले इसे क्या जानें।
जिनके होने से ज़माने में मोहब्बत है ज़िन्दगी।
हुस्न और इश्क़ की गहराई को पहचानो ज़रा, सिर्फ सूरत पे मिट जाना नहीं मक़्सूद-ए-वफ़ा।
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी मोहब्बत के इम्तिहाँ और भी हैं।
मोहब्बत मुझे उन युवाओं से है, जो सितारों पर डालते हैं निगाहें।
मोहब्बत भी ज़रूरी है, इबादत भी ज़रूरी है, ज़माने की नज़र में ये दोनों बगावत भी ज़रूरी हैं।
उम्र तमाम कटी इश्क़ के अज़ाब में
कटे न एक भी दिन हज़रत-ए-हिसाब में
इश्क़ का मर्तबा ऊँचा है हर इक रुतबे से
दिल को ये ज़िद है कि दिलदार बड़ा होता है
जान पर खेलते हैं हम लेकिन
दिल से जाती नहीं मोहब्बत तेरी
इश्क़ में जी को जलाने का मज़ा कुछ और है, आग में दिल को बसाने का मज़ा कुछ और है।
मोहब्बत में ये क्या मक़ाम आ गए हैं
कि हम खुद को खुद से जुदा पा रहे हैं
हयात-ए-जावेदाँ मक़्सूद है तो इश्क़ में डूबो
यही इक रास्ता है जो हमें मंज़िल पे ले जाए
ख़ुलूस-ए-दिल से जो की जाए वो पूजा रंग लाती है
मोहब्बत में अदावत का गुज़र होना नहीं मुमकिन
प्रेम और स्नेह के बिना जीवन एक सूखा रेगستان मात्र बनकर रह जाता है।
देह देवाचे मंदिर, आत आत्मा परमेश्वर, मानवाचा मानवाशी प्रेमाचाच व्यवहारी घर।
चित्तशुद्धीविना भजन ते व्यर्थ, प्रेमाविना भक्तीचा नसे काही परमार्थ।
खरा तो एक धर्म, ज्याचे समाधान। मनासी पावे पूर्ण प्रेमभक्ती।
संत वो है जो दूसरों के दुख को समझे और प्रेम का संदेश फैलाए।
प्रेम न बाड़े बारी उपजे, प्रेम न हाट बिकाय। राजा प्रजा जो कोइ रुचि, प्रेम हाट लइ जाय॥
सहज प्रेम सोई प्रभु पावै, कपट न टिकै द्वार। रैदास कहे सतसंग महिं, उतरे भवजल पार॥
प्रेम और करुणा के बिना जीवन व्यर्थ है, जिस हृदय में प्रेम नहीं वह मसान के समान है।
दादू प्रेम प्रगट कीजिए, राखिए नहिं छिपाए
जो घट प्रेम न संचरै, सो घट मूरख जाए
जो दूसरों को अपना हिस्सा मानता है, वही सच्चा प्रेम और करुणा जानता है।
प्रेम कोई वस्तु नहीं जिसे पाया जाए, यह तो तुम्हारा अपना सहज स्वरूप है।
यदि आप भगवान से प्रेम करते हैं, तो आप हर जीव से प्रेम करेंगे।
प्रेम और आदर से ही समाज में एकता और बंधुत्व की भावना को सुदृढ़ किया जा सकता है।
तिलक जी के साथ मेरे मतभेद हो सकते हैं, लेकिन देश के प्रति उनके प्रेम पर मुझे कोई संदेह नहीं है।
धर्म का वास्तविक उद्देश्य प्रेम, करुणा और मानवता की सेवा करना है।
प्रेम और करुणा ही वे ताकतें हैं जो नफरत और भेदभाव के बंधनों को काटती हैं।
हमें अपनी माटी से प्रेम है और हम अपनी इस पवित्र भूमि को विदेशियों के हवाले नहीं करेंगे।
अपनी माटी, जल और जंगलों से निस्वार्थ प्रेम करना ही मनुष्य का सबसे पहला कर्तव्य है।
प्रेम की अभिव्यक्ति और परोपकार की भावना ही मानव समाज को सबसे अधिक मजबूत बनाती है।
प्रेम ही एकमात्र ऐसी शक्ति है जो किसी शत्रु को मित्र में बदल सकती है।
प्रेम हर जगह भूख है, रोटी की नहीं, बल्कि प्यार और अपनेपन की।
हम महान चीजें नहीं कर सकते, केवल महान प्रेम के साथ छोटी चीजें कर सकते हैं।
यदि आप न्याय करने बैठेंगे, तो लोगों से प्रेम करने का समय नहीं मिलेगा।
दया और प्रेम भरे शब्द छोटे हो सकते हैं, लेकिन उनकी गूंज वाकई अनंत होती है।
सच्चा प्यार हमेशा दर्द देता है, जब तक कि वह दर्दनाक न हो, तब तक वह सच्चा नहीं है।
दया और प्रेम के शब्द छोटे हो सकते हैं, लेकिन वास्तव में उनकी गूंज अनंत होती है।
हम अपने छोटे-छोटे कार्यों में कितना प्रेम डालते हैं, यही सबसे अधिक मायने रखता है।
अगर आप अपने परिवार से प्यार करना चाहते हैं, तो पहले अपने घर से ही शुरुआत करें।
अपने सहयोगियों से बेटों की तरह प्रेम करें, वे गहरी खाई में भी साथ देंगे।
सच्चा प्रेम वही है जो सुधार की मांग करे; सच्ची निष्ठा वही है जो गलत मार्ग पर टोकने का साहस रखे।
अगर आप किसी को हराना चाहते हैं, तो उसे अपने तर्क से नहीं, बल्कि अपने प्रेम से जीतिए।
सच्चा प्यार कभी भी अपनी तय डगर पर आसानी से नहीं चलता है।
प्रेम अंधा होता है और प्रेमी यह देख नहीं पाते कि वे कितने मूर्खतापूर्ण काम कर रहे हैं।
प्रेम और कला का कोई अंत नहीं है, ये अनंत हैं।
प्रेम वही है जो हमें जीवित होने का अहसास कराता है और हमारे दुखों को हल्का करता है।
प्रेम वह शक्ति है जो इंसान को महान कार्य करने और खुद को भूलने की प्रेरणा देती है।
जब आप प्यार करते हैं, तो आप उस व्यक्ति से प्यार करते हैं जैसा वह है।
प्रेम ही एकमात्र ऐसी शक्ति है जो इंसान को एक बेहतर और संपूर्ण इंसान बनाती है।
जीवन का अर्थ केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि प्रेम और सेवा के साथ जीना है।
इस जीवन रूपी सफर में प्रेम ही वह पूंजी है जो अंत तक साथ निभाती है।
प्रेम ही वह सेतु है जो तुम्हें हर चीज़ से जोड़ता है।
जो जलता नहीं है, वह प्रकाश नहीं दे सकता; प्रेम में जलना ही असली जीवन है।
प्रेमी अंततः कहीं मिलते नहीं हैं, वे हमेशा से एक-दूसरे के भीतर ही होते हैं।
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प्रेम ही वह एकमात्र बल है जो दुश्मन को भी दोस्त में बदल सकता है।
प्रेम आपको केवल अपनी पूर्णता देता है, और वह केवल अपने में से ही लेता है।
प्रेम कुछ नहीं देता सिवाय अपने के, और कुछ नहीं लेता सिवाय अपने से।
जब प्रेम आपको इशारा करे, तो उसका अनुसरण करें, भले ही उसके मार्ग कठिन हों।
करुणा असल में न्याय से बहुत आगे की चीज़ है, क्योंकि करुणा ही प्रेम का दूसरा नाम है।
आपके मित्र आपकी आवश्यकताओं के उत्तर हैं, जो आपने प्रेम से बोए हैं और कृतज्ञता से काटे हैं।
विरह के बिना प्रेम कभी अपनी गहराई को नहीं पहचान पाता, जब तक चोट न लगे।
आपका मित्र आपकी आवश्यकताओं का उत्तर है, जिसे आपने बहुत प्रेम से बोया है।
प्रेम वह पवित्र बंधन है जो दो अलग-अलग अनजान इंसानों को एक ही धड़कन में पिरो देता है।
जात-पात दे चक्कर विच, क्यों उरझे ओ यार।
असली मज़हब प्रेम है बुल्ला, बाकी सब दीवार।
सूफी मत की राह चले हम, इश्क मुस्तफा में ढले हम
दुनिया की परवाह किसे है, जब यार की बाहों में पले हम
खलक में नाम तेरा ही गूंजे, ऐ मेरे प्यारे पिया
तुझ बिन सूनी है मेरी दुनिया, तुझ पर वारे जिया
रहीमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ पड़ जाय॥
प्रीति कठिन है प्रेम की, मूँड़ कटाए बोल। कहि रहीम ते उबरै, जो रस सके न तोल॥
सच्चा प्रेम वही है जो दिलों को जोड़े और इंसानियत को सबसे ऊपर रखे।
प्रेम और करुणा के बिना कोई भी समाज मानवीय नहीं बन सकता, हर प्राणी के प्रति दया भाव रखना ही सच्ची इंसानियत है।
सच्चा प्रेम स्वार्थ की सीमाओं को तोड़कर आत्मा को मुक्त कर देता है।
दिल में है प्यार वतन का, आँखों में है आज़ादी का सपना, यही है जीवन का एकमात्र लक्ष्य अपना।
दिलों में शोला-ए-इश्क़-ए-वतन जलाए रखो, हर मुश्किल का डटकर मुकाबला करने का हौसला बनाए रखो।
वतन की राह में जो दर्द मिला उसे इनाम समझा, हमने हर ज़ख्म को अपने देश के वास्ते प्यार का पैग़ाम समझा।
शिक्षा वही सही मायने में सार्थक है जो इंसान के दिल में देशप्रेम और इंसानियत की मशाल जला सके।
प्रेम अगर वतन से हो तो हर मुसीबत आसान लगती है, और मौत भी एक खूबसूरत दुल्हन जैसी प्रतीत होती है।
प्रेम और पीड़ा के बिना कोई भी कलाकार या कवि महान नहीं बन सकता।
सच्चा प्रेम वह नहीं जो बाँधकर रखे, बल्कि वह है जो पंख फैलाकर उड़ने की आज़ादी दे।
प्रेम
युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाना ही हमारा सबसे बड़ा दायित्व है।
प्रेम और बंधुत्व की भावना से ही समाज की समस्त दूरियों और कुप्रथाओं को मिटाया जा सकता है।
धर्म का सार प्रेम, करुणा और बंधुत्व में निहित है, न कि कर्मकांडों में।
प्रेम वह शक्ति है जो नफरत को मिटाकर दो दिलों को हमेशा के लिए जोड़ देती है।
सच्चा प्रेम वही है जो व्यक्ति को कमजोर नहीं, बल्कि संघर्षशील बनाए।
बाणभट्ट की आत्मकथा संस्कृत साहित्य और प्रेम का अद्भुत आख्यान है।
प्रेम कोई व्यापार नहीं है जिसमें लेन-देन देखा जाए, यह तो बिना किसी शर्त के सर्वस्व समर्पण है।
प्यार केवल एक अहसास नहीं, यह अन्याय के खिलाफ एक बड़ी बगावत है।
प्यार समर्पण की वह शांत नदी है, जो बिना शर्त बस बहना जानती है।
बूँदें हैं या मोती हैं ये, जगमग करते तारे से, हँसते हैं छोटे पौधे भी मानो कुछ प्यारे से।
प्रेम वही जो बाँटे प्राण, स्नेह से सींचे जग का मान, स्वार्थरहित हो जिसकी ज्योति, वही है जीवन का वरदान।
समाज और न्याय की रेखा, सब पर हो समान अधिकार, ऊँच-नीच का भेद मिटाकर, गूँजे बस प्रेम पुकार।
प्रेम वह पवित्र बंधन है जो दिलों को जोड़ता है, वैर-भाव और नफरत का हर अंधकार तोड़ता है।
प्रेम कसौटी जो घटै, तरसै ताहि न आन।
पैअ न प्रेम कहूं बिनु जाने, ताहि मरम कस आवै बखाने।
स्वदेश-प्रेम ही सबसे बड़ा धर्म है, इसके बिना सब नीरस है।
प्रेम दीवानी रसखान कहें, बिन प्रेम न काहू को काज सरे
प्रेम वाटिका के हरे भरे पौधे हर दिल में प्रेम जगाते हैं
मानुष प्रेम प्रगट भइ भाखै, जो रसखान सु जानें सु राखै।
प्रेम की फाँसी परी गले में, अब का छूटत है रसखानि।
प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय। राजा प्रজা जेहि रुचे, सीस देइ ले जाय।
प्रेम सुधानिधि जो जन चाखै, तासु प्रताप जगत में राखै।
प्रेम ही भगवान है और भगवान ही प्रेम है, इसके अलावा कुछ भी सत्य नहीं है।
सच्चा प्रेम वह है जो किसी प्राप्ति की उम्मीद नहीं रखता, बल्कि केवल देना और त्याग करना जानता है।
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है
हर शख्स यहाँ प्यार की कीमत से अंजान है
ऐ शराबे-मुहब्बत के मतवालों, दुनिया की हर चीज़ से प्यार करो
क्या अपना, क्या पराया, सब इन बाहों में आज़ाद करो
सिंदूर तिलकित भाल, मौन रहकर भी सब कुछ कह जाता है, प्यार का यह अछोर संसार।
प्रेम वह पवित्र बंधन है जो जात-पात और सरहदों की दीवारों को आसानी से गिरा देता है।
हे मेरी जन्मभूमि भारत! तू मुझे प्राणों से भी प्यारी है।
देशप्रेम की भावना से बढ़कर इस संसार में कोई और पूंजी नहीं।
प्रेम और करुणा का ही दूसरा नाम मनुष्यता है, जो इसके बिना है वह केवल पाषाण है।
प्रेम की भाषा अमूक है, नेत्रों से उसकी अभिव्यक्ति होती है, जो हृदय की गहराइयों को सीधे स्पर्श करती है।
आह! वेदना ही जीवन का सत्य है, यही वह कसौटी है जिस पर प्रेम और साधना के सच्चे आभूषण कसे जाते हैं।
यदि लोग नफरत करना सीख सकते हैं, तो उन्हें प्यार करना भी सिखाया जा सकता है, क्योंकि प्यार इसके विपरीत स्वाभाविक रूप से आता है।
घृणा से घृणा कभी खत्म नहीं होती, घृणा केवल प्रेम से समाप्त होती है, यही सनातन नियम है।
हम दुनिया को तब जानते हैं जब हम उससे प्रेम करते हैं।
सच्चा प्रेम वही है जो सर्वस्व समर्पित करने के बाद भी खालीपन महसूस न करे।
सच्चा प्रेम कभी खुद को बंधनों में नहीं बांधता, वह हमेशा प्रिय को पूरी स्वतंत्रता देता है।
अपने काम से प्यार करो, लेकिन कभी अपनी कंपनी से प्यार मत करो क्योंकि तुम नहीं जानते कब कंपनी को तुम्हारी जरूरत न हो।
प्रेमी, पागल और कवि एक ही चीज़ के बने होते हैं, और वह है - कल्पना!
प्रेम मनुष्य को कोमल बनाता है, किंतु देश के प्रति प्रेम उसे अटूट संकल्प देता है।
प्रेम ही जीवन का नियम है, द्वेष और घृणा से केवल विनाश होता है।
प्रेम ही एकमात्र कानून है; जो प्रेम करता है वह जीता है, जो द्वेष रखता है वह मरता है।
इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या
आगे-आगे देखिए होता है क्या
दगाबाज़ी से कब बाज आते हैं ये दिलवाले
मोहब्बत में नहीं कोई किसी का यार ऐ 'मीर'
इश्क़ का हमारे ये हाल है ऐ 'मीर'
दिन को नहीं आराम रात को नहीं चैन
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं وصل की راحت के सिवा
तुझ से ही इब्तिदा-ए-इश्क़ है तुझ से ही तमाम
मेरी दुनिया मिरे अफ़्सानूर का उनवान तू है
न गिला रहा किसी का न किसी से बैर रखा
हमने जो सही मोहब्बत में अकेले सही
और भी ग़म हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
हे री मैं तो प्रेम दीवानी, मेरो दरद न जाने कोय
घायल की गति घायल जाने, और न जाने कोय
महलों का राज त्याग कर, मीरा भई जोगन
कृष्ण-प्रेम की मस्ती में, झूमे सारा आँगन
प्रेम प्रकट होई भगति सों, जग में रह्यो प्रगट जोइ।
जग का जो भी कुछ भार रहा, मैंने उसको कब प्यार रहा?
है दोनों हाथों में मधु का प्यारा, मन मतवाला है
प्रेम और सौन्दर्य बिना जीवन एक मरुस्थल है
स्वदेश प्रेम वह पुण्य क्षेत्र है, जिससे बढ़कर कुछ नहीं
प्रेम वही है जो अधिकार की भावना से मुक्त हो।
विरह में भी प्रेम की जो पवित्रता और गहराई है, वह मिलन के उल्लास में दुर्लभ है।
प्रेम स्वार्थ का नहीं, बल्कि सर्वस्व समर्पण और त्याग का दूसरा नाम है।
प्रेम और करुणा के बिना मनुष्य का जीवन पशु के समान है।
त्याग के बिना प्रेम अधूरा है और न्याय के बिना समाज।
सच्चा प्रेम वही है जो स्वार्थ से परे हो और त्याग की कसौटी पर खरा उतरे।
रहीमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय परिध
धिन धिन प्रेम प्रवीन को, जो समझे मन की बात। रहिमन ऐसे प्रेम पै, तन मन सब कुबरात॥
छिमा बड़ाई छोट को, भुजंग को उत्पाद। प्रेम प्रीति कूँ जानिए, नहिं घटत है आधि व्याधि॥
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोइ। ढाई आखर प्रेम का, पढ़ै सो पंडित होइ॥
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है मिरे आक़ा 'ग़ालिब'
कि ये वो आग है जो लगाए न लगे और बुझाए न बने
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का, उसी को देख कर जीते हैं जिस पर काफ़िर दम निकले।
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