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स्वामी प्रभुपाद
संत
स्वामी प्रभुपाद
1896–1977
अभय चरणारविन्द भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद (1896–1977) गौड़ीय वैष्णव गुरु और इस्कॉन के संस्थापक थे। उन्होंने पश्चिमी दुनिया में कृष्ण भक्ति का प्रचार किया और श्रीमद्भागवतम् का अंग्रेजी अनुवाद किया।
स्वामी प्रभुपाद का जन्म 1 सितंबर 1896 को कलकत्ता में हुआ था। उनके बचपन का नाम अभय चरण डे था और गृहस्थ जीवन के बाद उन्होंने 1959 में संन्यास ग्रहण किया। अपने गुरु भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकूर की प्रेरणा से उन्होंने 1965 में अमेरिका जाकर अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) की स्थापना की। उन्होंने भगवद्गीता यथारूप और श्रीमद्भागवतम् जैसे ग्रंथों के अंग्रेजी अनुवाद व टीका के माध्यम से सनातन धर्म का वैश्विक प्रसार किया। वे 70 वर्ष की आयु में विदेश गए और अपने जीवनकाल में ही पूरी दुनिया में सैकड़ों मंदिर और गुरुकुल स्थापित किए। 14 नवंबर 1977 को वृंदावन में उनका महाप्रयाण हुआ, किंतु उनका भक्ति आंदोलन आज भी विश्व भर में निरंतर सक्रिय है।
स्वामी प्रभुपाद के अनमोल विचार
हम शरीर नहीं हैं, हम आत्मा हैं और शाश्वत रूप से भगवान के अंश हैं।