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अशफ़ाक़उल्ला ख़ान
क्रांतिकारी
अशफ़ाक़उल्ला ख़ान
1900–1927
अशफ़ाक़उल्ला ख़ान (22 अक्टूबर 1900 - 19 दिसंबर 1927) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और कवि थे। वे रामप्रसाद 'बिस्मिल' के घनिष्ठ मित्र और काकोरी कांड के प्रमुख नायकों में से एक थे। देश की आज़ादी के लिए हँसते-हँसते फाँसी पर झूलने वाले वे अमर शहीद थे।
अशफ़ाक़उल्ला ख़ान का जन्म शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। कम उम्र में ही वे क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ गए और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के सक्रिय सदस्य बने। 9 अगस्त 1925 को हुए काकोरी ट्रेन एक्शन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद फैजाबाद जेल में उन्हें फाँसी दी गई। वे 'हसरत' और 'वारसी' उपनाम से उर्दू और हिंदी में शायरी भी करते थे। उनकी देशभक्ति और रामप्रसाद 'बिस्मिल' के साथ उनकी अनूठी मित्रता आज भी भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।
अशफ़ाक़उल्ला ख़ान के अनमोल विचार
कुछ आरजू नहीं है, है आरजू तो यह कि, रख दें कोई जरा सा खाक-ए-वतन सिरों पर।