
सूफी कवि
बुल्ले शाह
1680–1757
बुल्ले शाह सत्रहवीं-अठारहवीं सदी के महान पंजाबी सूफी कवि थे। उनका असली नाम सैयद अब्दुल्ला शाह था और वे प्रेम, मानवता और अध्यात्म के प्रतीक माने जाते हैं।
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बुल्ले शाह का जन्म 1680 में पंजाब (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वे शाह इनायत कादरी के शिष्य थे और उन्होंने अपने गुरु से रूहानी ज्ञान प्राप्त किया। उनकी शायरी में जाति-पाति और मजहबी कट्टरता का खुलकर विरोध मिलता है। उन्होंने प्रेम और मानवता को ही सबसे बड़ा धर्म माना। उनकी काफ़ियाँ और दोहे आज भी पंजाब और उत्तर भारत में बड़े चाव से गाए जाते हैं। 1757 में उनका देहांत हो गया, लेकिन उनकी वाणी अमर है।
बुल्ले शाह के अनमोल विचार
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मक्के गए तों हज होनदाई, जे दिल विच खोट होवे।
गंगा नहाते काइ धोवनदाई, जे मन मैला होवे।
गंगा नहाते काइ धोवनदाई, जे मन मैला होवे।
जिस तन लगिया इष्क कमाया, ओही जाणे हाल।
कांट्या चुभे जे पैर विच मेरे, मैं बुड्ढी भई निहाल।
कांट्या चुभे जे पैर विच मेरे, मैं बुड्ढी भई निहाल।
इष्क दी नाईं रीत निराली, सर दी बाज़ी लाई।
रब्ब नू पाणा इक खोज़ है, सच्ची प्रीत कमाई।
रब्ब नू पाणा इक खोज़ है, सच्ची प्रीत कमाई।
धूल पांण दुनिया ते रखिया, दिल दा शीशा साफ करो।
अहंकार नू मार के बन्दे, रब्ब दे चरणीं लग जाओ।
अहंकार नू मार के बन्दे, रब्ब दे चरणीं लग जाओ।
दुनिया दे विच मान न करिए, मिट्टी विच मिल जाणा।
कदर करो हर इक इंसान दी, फेर किसे नहीं आणा।
कदर करो हर इक इंसान दी, फेर किसे नहीं आणा।
भेद इष्क दा कोई ना जाणे, जे कोई जाणे तीर सहे।
सीने अंदर आग बले पर, मुँह तों उफ न करे।
सीने अंदर आग बले पर, मुँह तों उफ न करे।
जात-पात दे चक्कर विच, क्यों उरझे ओ यार।
असली मज़हब प्रेम है बुल्ला, बाकी सब दीवार।
असली मज़हब प्रेम है बुल्ला, बाकी सब दीवार।
दुनिया वाले रब्ब नू labhde, मंदिर और मसीतां विच।
अस्सी तां यार नू दिल विच थप्प्या, लुका के चीतां विच।
अस्सी तां यार नू दिल विच थप्प्या, लुका के चीतां विच।
चुप रहना ते सच कहना, इष्क दी पहली सीढ़ी है।
दुनिया नाल की लड़ना बुल्ला, किस्मत सब दी लिखी है।
दुनिया नाल की लड़ना बुल्ला, किस्मत सब दी लिखी है।
उठ जा जाग फकीरा हुण तां, रात विहाण लगी।
सांसों दी डोरी टुट्ट जानी, बाज़ी हार जाणा।
सांसों दी डोरी टुट्ट जानी, बाज़ी हार जाणा।
दिल दा हुजरा साफ करो जी, यार ने विच वस्णा।
मैं-मेरी नू छड्ड के बुल्ला, सब नू अपनाणा।
मैं-मेरी नू छड्ड के बुल्ला, सब नू अपनाणा।
पढ़ पढ़ इल्म हजार किताबन, कदे अपने आप नू पढ़्या नईं।
जा जा वड़दा मसीतां अंदर, कदे मन अपने नू छड्या नईं।
जा जा वड़दा मसीतां अंदर, कदे मन अपने नू छड्या नईं।
रांझा वेहड़े आ वस्या, मेरे भाग जाग पए।
दुनिया सारी धक्के खांदी, अस्सी प्रीतम पा लए।
दुनिया सारी धक्के खांदी, अस्सी प्रीतम पा लए।