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घाग-भड्डरी
लोककवि
घाग-भड्डरी
आसपास 1600
घाग और भड्डरी हिंदी क्षेत्र के प्रसिद्ध लोककवि और भविष्यवक्ता थे जो लगभग 1600 ईस्वी के आसपास हुए। इनकी कही गई कृषि और मौसम संबंधी कहावतें आज भी उत्तर भारत के किसानों के बीच मार्गदर्शक मानी जाती हैं।
घाग और भड्डरी सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के लोक-संस्कृति से जुड़े ऐसे ज्योतिषी और कृषक कवि हैं जिनका ज्ञान अनुभव पर आधारित था। इन्हें कृषि मौसम विज्ञान का आदि-पुरुष भी कहा जाता है, क्योंकि इनकी भविष्यवाणियाँ पशु-पक्षियों के आचरण, बादलों की स्थिति और हवा की दिशा पर सटीक बैठती थीं। इनकी वाणी में लोकजीवन की गहरी समझ और व्यावहारिक बुद्धि का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। पूर्वांचल और अवध के क्षेत्रों में इनकी कहावतें आज भी बुजुर्गों की जुबान पर जीवित हैं। इनका प्रभाव केवल खेती-किसानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण लोक-साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।