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जैनेंद्र कुमार
कथाकार
जैनेंद्र कुमार
1905–1988
जैनेंद्र कुमार हिंदी कथा साहित्य के प्रमुख मनोवैज्ञानिक कथाकार और निबंधकार थे। उन्होंने प्रेमचंदोत्तर युग में व्यक्ति को केंद्र में रखकर कहानियों और उपन्यासों की रचना की। उनके लेखन में भारतीय संस्कृति और पाश्चात्य मनोविज्ञान का अनूठा संगम मिलता है।
जैनेंद्र कुमार का जन्म 2 जनवरी 1905 को अलीगढ़ के कौड़ियागंज में हुआ था। वे हिंदी साहित्य में 'मनोवैज्ञानिक उपन्यास परंपरा' के प्रवर्तक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। 'परसुख', 'फांसी', 'नीलम देश की राजकन्या' जैसे कहानी संग्रहों और 'परख', 'त्यागपत्र', 'सुनीता' जैसे उपन्यासों ने उन्हें अपार ख्याति दिलाई। उनके साहित्य में समाज और व्यक्ति के बीच के अंतर्द्वंद्व, नैतिकता, और स्वतंत्रता का सूक्ष्म चित्रण मिलता है। उन्हें भारत सरकार द्वारा 'पद्मभूषण' और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1988 में उनका देहावसान हुआ।
जैनेंद्र कुमार के अनमोल विचार
साहित्य मनुष्य के भीतर की छुपी हुई करुणा और उसकी मुक्ति का जीवंत दस्तावेज है।