हिंदी में सुविचार, शायरी, शिक्षा, पैसा और बिज़नेस की जानकारी
गजानन माधव मुक्तिबोध
कवि
गजानन माधव मुक्तिबोध
1917–1964
गजानन माधव मुक्तिबोध हिंदी के महान और प्रगतिशील कवि, आलोचक तथा विचारक थे। वे 'तार सप्तक' के प्रमुख कवियों में शामिल हैं और 'अंधेरे में' उनकी अत्यंत प्रसिद्ध लंबी कविता है।
गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर 1917 को श्योपुर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अध्यापन और पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए हिंदी साहित्य में नया मोड़ दिया। वे मार्क्सवाद और अस्तित्ववाद के संबल से मानवीय चेतना और संघर्ष को अपनी रचनाओं का आधार बनाते थे। उनकी भाषा जटिल, प्रतीकात्मक और अंतःसंघर्ष से भरी हुई है जो आधुनिकता की बेचैनी को बखूबी व्यक्त करती है। 'चाँ का मुंह टेढ़ा है' उनका एकमात्र प्रकाशित कविता संग्रह है, जिसने हिंदी काव्य जगत में हलचल मचा दी। उनका निधन 11 सितंबर 1964 को हुआ था, किंतु उनका वैचारिक और साहित्यिक प्रभाव आज भी जीवंत है।
गजानन माधव मुक्तिबोध के अनमोल विचार
सहर्ष स्वीकारा है: जिंदगी में जो कुछ है, जो भी है, वह सब तुम्हारा है!