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अल्लामा इक़बाल
शायर और दार्शनिक
अल्लामा इक़बाल
1877–1938
अल्लामा मुहम्मद इकबाल (1877–1938) भारत के महान शायर, दार्शनिक और चिंतक थे। उन्होंने 'सारे जहाँ से अच्छा' जैसी प्रसिद्ध रचना दी और 'खुदी' का प्रसिद्ध दार्शनिक सिद्धांत प्रतिपादित किया।
अल्लामा मुहम्मद इकबाल का जन्म 9 नवंबर 1877 को सियालकोट में हुआ था। उन्होंने दर्शनशास्त्र और कानून की उच्च शिक्षा लाहौर, कैम्ब्रिज और म्यूनिख से प्राप्त की। उनकी प्रारंभिक उर्दू और फारसी शायरी में देशभक्ति और मानवता का संदेश झलकता है, जिसमें 'सारे जहाँ से अच्छा' विशेष है। बाद में वे इस्लामी दर्शन, आत्म-सम्मान (खुदी) और वैश्विक मुस्लिम बंधुत्व के प्रणेता बने। उनकी प्रमुख कृतियों में 'बाँग-ए-दारा', 'बाल-ए-जिब्रिल' और 'जरब-ए-कलीम' शामिल हैं। 21 अप्रैल 1938 को उनका इंतकाल हुआ, किंतु उनका दार्शनिक और साहित्यिक योगदान आज भी अमर है।
अल्लामा इक़बाल के अनमोल विचार
हिंदी हैं हम, वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा, सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा।