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संत ज्ञानेश्वर
संत कवि
संत ज्ञानेश्वर
1275–1296
संत ज्ञानेश्वर तेरहवीं सदी के महान वारकरी संत, कवि और दार्शनिक थे। उन्होंने अत्यंत अल्प आयु में ही मराठी भाषा में भगवद्गीता का प्रामाणिक टीकाग्रंथ 'ज्ञानेश्वरी' लिखकर भक्ति आंदोलन को अभूतपूर्व दिशा दी।
संत ज्ञानेश्वर का जन्म 1275 ईस्वी में महाराष्ट्र के पैठण के समीप आपेगाव में हुआ था। उनके पिता विठ्ठलपंत और माता रुक्मिणीबाई थीं, जिन्हें समाज के ಬಹिष्कृत होने पर भी आध्यात्मिक दृढ़ता बनाए रखी। ज्ञानेश्वर महाराज ने मात्र पंद्रह वर्ष की आयु में 'भावार्थदीपिका' (ज्ञानेश्वरी) की रचना कर ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने 'अमृतानुभव' और 'चांगदेव पासष्टी' जैसे ग्रंथों की भी रचना की। वारकरी संप्रदाय की नींव रखने में उनका और उनके भाई-बहनों (निवृत्तिनाथ, सोपान और मुक्ताबाई) का अतुलनीय योगदान रहा। उन्होंने 1296 ईस्वी में आंदी में जीवित समाधि ली, किंतु उनका साहित्य आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है।
संत ज्ञानेश्वर के अनमोल विचार
जे का रंजले गांवाजले, त्यासि म्हणे जो आपुलीया
तोचि साधू ओळखावा, देव तेथेंचि जाणावा