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रमण महर्षि
संत
रमण महर्षि
1879–1950
भगवन् श्री रमण महर्षि (1879–1950) बीसवीं सदी के महान भारतीय संत और अद्वैत वेदांत के प्रमुख प्रणेता थे। उनका संपूर्ण जीवन आत्म-अनुसंधान और मौन उपदेश को समर्पित रहा, जिससे विश्वभर के साधक आज भी लाभान्वित होते हैं।
श्री रमण महर्षि का जन्म 30 दिसंबर 1879 को तमिलनाडु के तिरुचूझी में हुआ था। सत्रह वर्ष की अल्पायु में उन्हें मृत्यु का ऐसा तीव्र अनुभव हुआ जिससे उनका अहंपन सदा के लिए मिट गया और वे अरुणाचल पर्वत की शरण में चले गए। उन्होंने अपने जीवनकाल में कोई जटिल ग्रंथ नहीं लिखा, बल्कि 'मैं कौन हूँ?' जैसे सरल आत्म-विचार के माध्यम से साधकों को मुक्ति का मार्ग दिखाया। वे जीवनभर अरुणाचल प्रदेश के तिरुवண்ணாமलाई में रहे और उनके सान्निध्य ने देश-विदेश के हजारों खोजियों को आंतरिक शांति प्रदान की। 14 अप्रैल 1950 को उन्होंने महासमाधि ली, किंतु उनका आध्यात्मिक प्रभाव आज भी अमर है।
रमण महर्षि के अनमोल विचार
मन क्या है? यह केवल हमारे भीतर विचारों का एक प्रवाह मात्र है।