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रूमी
सूफी कवि
रूमी
1207–1273
जलालुद्दीन मुहम्मद रूमी (१२०७–१२७३) तेरहवीं सदी के महान फारसी सूफी कवि और दार्शनिक थे। उनकी कविताएँ प्रेम, अध्यात्म और मानवता का संदेश देती हैं, जो आज भी पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं।
जलालुद्दीन रूमी का जन्म आज के ताजिकिस्तान या अफगानिस्तान के क्षेत्र में हुआ था और जीवन का अधिकांश समय उन्होंने टर्की के कोन्या में बिताया। उनके जीवन और विचारों पर उनके आध्यात्मिक गुरु शम्स तब्रीज़ी का गहरा प्रभाव पड़ा, जिसके बाद उनकी शायरी में दिव्य प्रेम का ज्वार उमड़ पड़ा। रूमी की रचनाओं में 'मसनवी' को सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त है, जिसे फारसी का कुरान भी कहा जाता है। उन्होंने 'मौलवीया' या 'व्हirling Dervishes' (नृत्य करने वाले दरवेश) सिलसिले की नींव रखी। रूमी का साहित्य धर्म और संस्कृति की सीमाओं से परे जाकर सीधे मनुष्य की आत्मा को संबोधित करता है। आज वे दुनिया भर में सबसे अधिक पढ़े जाने वाले और लोकप्रिय कवियों में गिने जाते हैं।