
सिख गुरु
गुरु गोबिंद सिंह
1666–1708
गुरु गोबिंद सिंह (1666–1708) सिखों के दसवें गुरु, महान योद्धा, कवि और दार्शनिक थे। उन्होंने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की और मुगलों के अत्याचार के विरुद्ध डटकर संघर्ष किया।
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गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 1666 में पटना साहिब में हुआ था। वे त्याग, शौर्य और साहित्य के अद्वितीय संगम थे, जिन्होंने अपना पूरा परिवार धर्म और मानवता की रक्षा के लिए न्योछावर कर दिया। उन्होंने 'दशम ग्रंथ' की रचना की और अद्यतन गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों के अंतिम गुरु के रूप में स्थापित किया। उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना, अधर्म का नाश और संतों की रक्षा करना था। उनका रचा हुआ 'चंडी दी वार' और 'जाप साहिब' हिंदी और पंजाबी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।
गुरु गोबिंद सिंह के अनमोल विचार
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देह शिवा वर मोहे इहै शुभ गमन करन ते कबहुँ न टरौं
न डरों अरि सो जब जाइ लरौंनिश्चय करि अपनी जीत करौं
न डरों अरि सो जब जाइ लरौंनिश्चय करि अपनी जीत करौं
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इhै सुत जनम सु सुधारन को उच्छाह ह्वै सत्त सुधर्म करौं
सब पाप ते दूर रहूँ सदा रचि अपने मन मैं इह बात धरौं
सब पाप ते दूर रहूँ सदा रचि अपने मन मैं इह बात धरौं
कृपा करि हुमकै सब सैन सु बीर छबीले घये आगे
उछाह बढ़ाय महा रण मैं अति कोप भरे अति रोष पागे
उछाह बढ़ाय महा रण मैं अति कोप भरे अति रोष पागे
जाहि न रूप रंग अरु रेख कोउ कह सकत कछू किह ठौर
मूल पुरुष अलेख कोउ भयो न जाहि और
मूल पुरुष अलेख कोउ भयो न जाहि और
ज्ञानी हैं तो ज्ञान से अहंकार को मिटाओ, अज्ञान ही मनुष्य का सबसे बड़ा और पहला शत्रु है।
सच्चे सिख वही हैं जो अपनी मेहनत की कमाई से खाते हैं और जरूरतमंदों को बाँटकर जीते हैं।
युद्ध के मैदान में पीछे हटने वाले कायर होते हैं, वीर वही हैं जो धर्म और न्याय के खातिर डटे रहते हैं।
जो मनुष्य निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करता है, वही इस संसार में सच्ची सफलता पाता है।
समय रेत की तरह फिसल जाता है, जो आज का काम कल पर टालता है वह हमेशा पछताता है।
मित्रता उसी से करो जो धर्म के मार्ग पर चले, स्वार्थी मित्र संकट के समय हमेशा साथ छोड़ जाते हैं।
सत्य के मार्ग पर चलने वाले को शुरुआत में कठिनाइयाँ मिलती हैं, पर अंत में विजय उसी की होती है।
समाज में फैले अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना ही हर सच्चे इंसान का पहला कर्तव्य है।
विद्या वह सबसे बड़ा धन है जो किसी से छीना नहीं जा सकता, यह मनुष्य का सबसे अच्छा आभूषण है।
प्रेम और करुणा के बिना जीवन व्यर्थ है, जिस हृदय में प्रेम नहीं वह मसान के समान है।
कठिनाइयां मनुष्य की हिम्मत की परीक्षा लेने आती हैं, इनसे घबराने के बजाय डटकर मुकाबला करो।