
उर्दू शायर
इब्राहीम ज़ौक़
1790–1854
इब्राहीम ज़ौक़ दिल्ली के एक प्रसिद्ध उर्दू शायर थे, जो अपने उस्तादाना अंदाज़ और भाषा पर अधिकार के लिए जाने जाते थे। वे अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फर के उस्ताद और 'ملك الشعراء' (कवियों के राजा) रहे।
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मुहम्मद इब्राहीम ज़ौक़ का जन्म 1790 में दिल्ली में हुआ था। वे आर्थिक रूप से साधारण परिवार से थे, लेकिन अपनी मेहनत और काव्य प्रतिभा से शाही दरबार तक पहुँचे। उन्होंने ग़ज़ल और कसीदा (प्रशंसा काव्य) विधा में विशेष ख्याति अर्जित की। वे बहादुर शाह ज़फर के उस्ताद और करीबी सलाहकार थे। समकालीन शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के साथ उनकी साहित्यिक प्रतिद्वंद्विता काफी चर्चित रही। 1854 में दिल्ली में उनका देहांत हुआ।
इब्राहीम ज़ौक़ के अनमोल विचार
ज़ौक़ अपनी ही तबीअत के हैं ख़ुद अपने असीर
हम को दीवार-ए-क़फ़स से कोई शिकवा न हुआ
हम को दीवार-ए-क़फ़स से कोई शिकवा न हुआ
कौन सा ग़म है कि दुनिया में नहीं है लेकिन
ऐसा ग़म कौन सा है जिस की दवा हो जाए
ऐसा ग़म कौन सा है जिस की दवा हो जाए
गरची है ज़ौक़ मुल्क-ए-सुख़न का बादशाह
पर मीर-ए-कारवाँ है मिरा दर्द-ए-दिल अभी
पर मीर-ए-कारवाँ है मिरा दर्द-ए-दिल अभी
न शिकवा-ए-लब-ए-बाम-ओ-न दर्द-ए-सर की है बात
ये सब ख़याल की बातें हैं चश्म-ए-तर की है बात
ये सब ख़याल की बातें हैं चश्म-ए-तर की है बात
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कूँचा-ए-यार में जब हुस्न का बाज़ार लगा
दिल का गाहक मिरे दिल से ही सरोकार लगा
दिल का गाहक मिरे दिल से ही सरोकार लगा
हम को तो बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता ने सोने न दिया कभी
वर्ना ज़माने भर की नींद आँखों में भरी थी
वर्ना ज़माने भर की नींद आँखों में भरी थी
क़ाफ़िला सालार-ए-गुल ने बूँद बूँद शबनम से
बाग़ के हर एक फूल की आँखें भर दी हैं
बाग़ के हर एक फूल की आँखें भर दी हैं
ऐ ज़ौक़ दिल की बात छुपा कर ही क्या मिला, दुनिया में नाम हो गया बेनाम हो के भी।
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दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ, बाजार से निकला हूँ खरीददार नहीं हूँ।
वक्त की धूप में जो जल गए शिद्दत से ज़ौक़, वही चराग अंधेरों में काम आए आख़िरकार।
सफर का नाम ही चलना है मेरे दोस्त ज़ौक़, मंजिल तो सिर्फ एक बहाना है उम्र भर का।
सच की राह पे चलना हमेशा कठिन रहा ज़ौक़, यहाँ हर मोड़ पे झूठे का मेला लगा मिला।
दोस्ती का सिला क्या दें ज़ौक़ इस जहाँ में, यहाँ अपने ही साए ने धोखा दिया हमें।
तालीम वो नहीं जो किताबों में कैद हो ज़ौक़, इंसानियत न सीखी तो सब इल्म है अधूरा।