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शकील बदायूंी
गीतकार
शकील बदायूंी
1916–1970
शकील बदायूंनी (3 अगस्त 1916 – 20 अप्रैल 1970) हिंदी सिनेमा और उर्दू अदब के महान गीतकार थे। उन्होंने अपनी सरल, सहज और असरदार शायरी से गीत-संगीत की दुनिया में एक विशिष्ट पहचान बनाई। उन्हें उनके रूमानी और दार्शनिक गीतों के लिए हमेशा याद किया जाता है।
शकील बदायूंनी का जन्म उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से फारसी और उर्दू में शिक्षा प्राप्त की और कुछ समय तक आपूर्ति विभाग में नौकरी की। मुशायरों में उनकी बढ़ती लोकप्रियता उन्हें मुंबई ले आई जहाँ उन्होंने फिल्म 'दर्द' (1947) के लिए गाने लिखकर अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की। नौशाद और मदन मोहन जैसे संगीतकारों के साथ उनकी जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को अमर संगीत दिया। उन्हें फिल्म 'बैजू बावरा', 'चौदहवीं का चाँद' और 'साहिब बीबी और गुलाम' जैसी फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। उनकी शायरी में आम आदमी की भावनाएं और इश्क की गहराई का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
शकील बदायूंी के अनमोल विचार
कोई सागर دل के पास नहीं, मेरा दिल ही किसी का प्यासा है
दिल की दुनिया में कोई खास नहीं, मेरा दिल ही किसी का प्यासा है