
दार्शनिक
कन्फ्यूशियस
ईसा पूर्व 551–479
कन्फ्यूशियस प्राचीन चीन के महान दार्शनिक, शिक्षक और राजनीतिक विचारक थे। उनके नैतिक और सामाजिक सिद्धांतों ने सदियों से एशियाई संस्कृति और जीवन-मूल्यों को गहराई से प्रभावित किया है।
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कन्फ्यूशियस का जन्म 551 ईसा पूर्व चीन के लू राज्य में हुआ था। उन्होंने व्यक्तिगत और सरकारी नैतिकता, सामाजिक संबंधों की rectitude और न्याय पर विशेष बल दिया। उनकी शिक्षाओं ने चीनी समाज में पारिवारिक सम्मान, परंपरा और शिक्षा को सर्वोच्च स्थान दिलाया। उनके शिष्यों द्वारा संकलित उनके विचार 'एनालेक्ट्स' (Analects) नामक ग्रंथ में संकलित हैं। कन्फ्यूशियस का प्रभाव केवल चीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कोरिया, जापान और वियतनाम की संस्कृतियों पर भी पड़ा। आज भी उनका दर्शन पूर्वी एशिया के मानस में जीवंत है।
कन्फ्यूशियस के अनमोल विचार
जो ज्ञान तुम्हारे पास है, उसे जानना और जो ज्ञान तुम्हारे पास नहीं है, उसे न जानना ही सच्चा ज्ञान है।
अपनी गलती को स्वीकार करने में कभी संकोच न करें, क्योंकि गलती सुधारना ही बुद्धिमत्ता है।
यदि आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, तो लक्ष्य को न बदलें, बल्कि अपने प्रयास की दिशा बदलें।
जो मनुष्य अपने गुस्से को काबू में नहीं रख सकता, वह बड़े संकटों को बुलावा देता है।
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यदि आप एक वर्ष की योजना बना रहे हैं, तो धान बोएँ; यदि दस वर्ष की योजना है, तो पेड़ लगाएँ।
नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो लोगों को नैतिक आचरण से प्रेरित करे, न कि केवल दंड के भय से।
जो व्यक्ति आगे की दूर की नहीं सोचता, उसे निकट भविष्य में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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बिना सोचे-समझे पढ़ना व्यर्थ की मेहनत है, और बिना पढ़े केवल सोचना बेहद खतरनाक है।
बड़ा पहाड़ हिलाने वाला मनुष्य भी शुरुआत छोटे-छोटे पत्थरों को हटाने से ही करता है।
जब आप किसी गुणी व्यक्ति को देखें तो उसके जैसा बनें; अवगुणी को देखें तो अपने भीतर झांकें।
श्रेष्ठ मनुष्य अपनी वाणी में अत्यंत विनम्र होता है, किंतु कर्म करने में सबसे आगे रहता है।
जो सही और न्यायसंगत है उसे देखकर भी न करना, भीतर साहस की कमी का सबसे बड़ा प्रमाण है।
ज्ञान पाने के तीन रास्ते हैं: चिंतन जो सबसे श्रेष्ठ है, अनुकरण जो सरल है, और अनुभव जो सबसे कड़वा है।
यदि आप अपने आने वाले कल को समझना और संवारना चाहते हैं, तो पहले अपने अतीत का अध्ययन करें।
जनता पर केवल भय और दंड से राज मत करो; उन्हें सदाचार से राह दिखाओ, वे स्वयं अनुशासित होंगे।
समझदार व्यक्ति हर भूल के लिए खुद को परखता है, जबकि कमजोर व्यक्ति सदा दूसरों पर दोष मढ़ता है।
बुराई और अन्याय का उत्तर निष्पक्ष न्याय से दो, और उपकार का उत्तर सदा भलाई व कृतज्ञता से दो।
किसी भी कार्य में सफलता पहले से की गई तैयारी पर निर्भर करती है; बिना तैयारी असफलता निश्चित है।
सच्चा प्रेम वही है जो सुधार की मांग करे; सच्ची निष्ठा वही है जो गलत मार्ग पर टोकने का साहस रखे।