ववाह वाह यारहिंदी में जानकारी · पूरे भारत के लिए
मेनू
WhatsApp चैनल
15 Oct 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
रहीम: रहमान वे नर मरि चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

रहमान वे नर मरि चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।

उनसे पहिले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहि॥

— रहीम

रहीम का यह प्रसिद्ध दोहा स्वाभिमान और उदारता के गहरे संबंध को दर्शाता है। वे कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी के आगे हाथ फैलाने जाता है, वह आत्मसम्मान खोकर मृत समान

रहीम की चुनी हुई पंक्तियाँ

समय पाय फल होत है, समय पाय तरु पोर
निरंतर फल चाहत है, समय कौन को जोर

रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गये न ऊबरै, मोती मानुष चून॥
धिन धिन प्रेम प्रवीन को, जो समझे मन की बात। रहिमन ऐसे प्रेम पै, तन मन सब कुबरात॥
तरु फल नहिं खात है सरवर पियत न पान
कहै रहीम परकाज हित, संपत्ति संचहि सुजान

कहै रहीम संपति सगै, बनत बहुत बहु रीत
विपत्ति कसौटी जे कसे, सोई साची मीत

वे गरीब नेवाज हैं, जो दीन्हों सब त्याग। रहिमन ऐसी रीति तैं, होत परम बैराग॥
काज परे कछु और है, काज सरै कछु और। रहीमन भौंरी के भये, नदी सिरावै मौर॥

रहीम के बारे में

रहीम (अब्दुल रहीम खान-ए-खाना) मध्यकालीन हिंदी साहित्य के महान कवि, नीतिार और सेनापति थे। वे अकबर और जहाँगीर के दरबार में प्रतिष्ठित थे और उनका काव्य मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत है। पूरा परिचय और सभी विचार: रहीम — लेखक कोश।

शेयर:FacebookTelegram

ये भी पढ़ें

awaraalfaz
लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 15 October 2026 · अपडेट: 15 October 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *