
मनुष्य वही है जो वह अपने विचारों से बनता है।
— अन्तोन चेख़व
सूक्ष्म, संवेदनशील और आडंबरहीन था। वे इंसान के बाहरी दिखावे के बजाय उसकी आंतरिक चेतना और मानसिक अंतर्द्वंद्व को समझने में रुचि रखते थे। उनका मानना था कि बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि
अन्तोन चेख़व की चुनी हुई पंक्तियाँ
अगर आप दुनिया में शांति चाहते हैं, तो अंदर से शांत रहना सीखिए।
ज्ञान तब तक कोई मूल्य नहीं रखता जब तक कि उसे प्रयोग में न लाया जाए।
जो लोग तर्क से बहस करते हैं, वे अपनी बात मनवाने में असमर्थ होते हैं क्योंकि उनके पास दिल नहीं होता।
अगर आप सफलता चाहते हैं, तो कभी भी खुद को किसी से कम मत समझिए।
इंसान का असली चरित्र तब सामने आता है जब वह किसी संकट में फंसा होता है।
हम अपनी जिंदगी के लेखक खुद हैं, बस जरूरत एक मजबूत इरादे और कलम उठाने की है।
समाज में न्याय तब तक संभव नहीं है जब तक लोग अन्याय के खिलाफ बोलना न सीखें।
अन्तोन चेख़व के बारे में
अन्तोन पाव्लोविच चेख़व (1860–1904) रूस के महान नाटककार और कथाकार थे। उन्हें आधुनिक लघुकथा का जन्मदाता माना जाता है। चेख़व की रचनाओं में मानवीय कमियों और जीवन की विसंगतियों का अत्यंत सूक्ष्म चित्रण मिलता है। पूरा परिचय और सभी विचार: अन्तोन चेख़व — लेखक कोश।
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