
सच्ची शिक्षा व्यक्ति को स्वतंत्र और निर्भीक बनाती
है, भयमुक्त जीवन ही ज्ञान का प्रमाण है।
— सर्वपल्ली राधाकृष्णन
महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का यह कथन शिक्षा के मूल उद्देश्य को उजागर करता है। उनका चिंतन एक संवेदनशील शिक्षक और तत्वज्ञानी का था, जो आंतरिक चेतना की मुक्ति को
सर्वपल्ली राधाकृष्णन की चुनी हुई पंक्तियाँ
सच्चा दर्शन वही है जो जीवन की वास्तविक समस्याओं को समझे और उनका समाधान प्रस्तुत करे।
ईश्वर की पूजा का सबसे श्रेष्ठ रूप मानवता की निःस्वार्थ सेवा करना है।
धर्म का उद्देश्य मनुष्य की चेतना को जागृत करना और उसे दिव्यता की ओर ले जाना है।
हमें अतीत की महानता पर गर्व होना चाहिए, लेकिन भविष्य का निर्माण अपनी वर्तमान मेहनत से करना चाहिए।
ईश्वर की पूजा का सबसे अच्छा तरीका मानवता की सेवा करना और दीन-दुखियों की मदद करना है।
सच्चे शिक्षक वे हैं जो हमें अपने लिए सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
सच्ची सफलता आत्म-संतोष और दूसरों के जीवन में प्रकाश लाने में निहित है।
सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1888–1975) भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे। वे एक महान दार्शनिक, शिक्षाविद् और भारतीय संस्कृति के प्रखर व्याख्याता थे। उनके जन्मदिन (5 सितंबर) को भारत में 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है। पूरा परिचय और सभी विचार: सर्वपल्ली राधाकृष्णन — लेखक कोश।
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