
दीपक की तरह बनो जो स्वयं जलकर दूसरों को रोशनी
देता है, ज्ञान का मार्ग भी ऐसा ही है।
— गौतम बुद्ध
महात्मा बुद्ध की यह कालजयी पंक्ति आत्म-त्याग, परोपकार और ज्ञान के वास्तविक स्वरूप को रेखांकित करती है। यह विचार बताता है कि सच्चा ज्ञान प्राप्त करना और बाँटना सहज नहीं है
गौतम बुद्ध की चुनी हुई पंक्तियाँ
घृणा से घृणा कभी खत्म नहीं होती, घृणा केवल प्रेम से समाप्त होती है, यही सनातन नियम है।
पानी की बूंद जब समुद्र में गिरती है तो वह समुद्र बन जाती है, जब वह अलग रहती है तो उसका अस्तित्व सीमित होता है।
क्रोध में हजार शब्द बोलने से बेहतर है कि आप चुप रहें, आपकी चुप्पी शांति लाती है।
अपने मोक्ष के लिए स्वयं ही प्रयास करो, दूसरों पर निर्भर मत रहो।
आप अपने विचारों से ही बनते हैं, जैसा आप सोचते हैं वैसा ही आप बन जाते हैं।
जो व्यक्ति अपने मन को वश में कर लेता है, उसके लिए जीतना किसी देवता के लिए भी असंभव नहीं है।
स्वास्थ्य सबसे बड़ा लाभ है, संतोष सबसे बड़ा धन है और विश्वास सबसे बड़ा संबंध है।
गौतम बुद्ध के बारे में
गौतम बुद्ध (563–483 ईसा पूर्व) बौद्ध धर्म के संस्थापक और महान दार्शनिक थे। उन्होंने संसार के दुखों से मुक्ति के लिए मध्यम मार्ग और अष्टमार्ग का उपदेश दिया। उनके विचार आज भी पूरी दुनिया में शांति और करुणा का संदेश देते हैं। पूरा परिचय और सभी विचार: गौतम बुद्ध — लेखक कोश।
विज्ञापन · Advertisement
ये भी पढ़ें
काव्यसर्वपल्ली राधाकृष्णन: सच्ची शिक्षा व्यक्ति को स्वतंत्र और निर्भीसच्ची शिक्षा व्यक्ति को स्वतंत्र और निर्भीक बनाती है, भयमुक्त जीवन ही ज्ञान का प्रमाण है। — सर्वपल्ली राधाकृष्णन30 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यजैनेंद्र कुमार: प्रेम अधिकार नहीं, बल्कि एक निःस्वार्थप्रेम अधिकार नहीं, बल्कि एक निःस्वार्थ और पवित्र समर्पण की अनुभूति है। — जैनेंद्र कुमार8 Oct 2026 पढ़ें →
काव्यसंत ज्ञानेश्वर: अवघे विश्वची माझे घर, ऐसा मतिचाअवघे विश्वची माझे घर, ऐसा मतिचा फेरा, सुख-दुःखाचा न वाटे वरा। — संत ज्ञानेश्वर26 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यचार्ल्स डार्विन: जीवों का विकास इस बात पर निर्भर करता है किजीवों का विकास इस बात पर निर्भर करता है कि वे अपने बदलते परिवेश के साथ कितनी जल्दी खुद को ढाल पाते…25 Sep 2026 पढ़ें →