
मातृभूमि के चरणों में जीवन समर्पित
करना ही सबसे बड़ा सौभाग्य है।
— सुभद्रा कुमारी चौहान
सुभद्रा कुमारी चौहान (1904–1948) की यह पंक्ति आज भी उतनी ही सटीक लगती है। नीचे उनकी चुनी हुई पंक्तियाँ पढ़िए।
सुभद्रा कुमारी चौहान की चुनी हुई पंक्तियाँ
क्रांति की आग बुझने न पाए, यही हमारे प्राणों का संकल्प होना चाहिए।
देश के खातिर मर मिटना ही हर सच्चे भारतीय का परम कर्तव्य है।
राष्ट्रीयता की भावना केवल पुरुषों की बपौती नहीं है, नारी भी देश के लिए सर्वस्व न्योछावर कर सकती है।
वीरों का कैंची और हथकड़ियों से कभी भी हौसला पस्त नहीं होता।
रोने से कब दुख कम होता है? जीवन तो संघर्षों की एक सतत यात्रा है।
अधिकारों की रक्षा के लिए अंत तक लड़ना ही सच्ची मनुष्यता है।
घायल हो कर गिरी सिंहनी वह वीर गति को प्राप्त हुई, इतिहास पुरुष भी साक्षी है उसकी अद्भुत गाथा का।
सुभद्रा कुमारी चौहान के बारे में
सुभद्रा कुमारी चौहान हिंदी की अत्यंत लोकप्रिय और राष्ट्रीय चेतना की ओजस्वी कवयित्री थीं। उनका जन्म इलाहाबाद के निहालपुर गाँव में हुआ था और वे अपनी वीररस की कविताओं के लिए अमर हैं। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट झलकती है। पूरा परिचय और सभी विचार: सुभद्रा कुमारी चौहान — लेखक कोश।
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