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29 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
सुभद्रा कुमारी चौहान: मातृभूमि के चरणों में जीवन समर्पित
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

मातृभूमि के चरणों में जीवन समर्पित

करना ही सबसे बड़ा सौभाग्य है।

— सुभद्रा कुमारी चौहान

सुभद्रा कुमारी चौहान (1904–1948) की यह पंक्ति आज भी उतनी ही सटीक लगती है। नीचे उनकी चुनी हुई पंक्तियाँ पढ़िए।

सुभद्रा कुमारी चौहान की चुनी हुई पंक्तियाँ

क्रांति की आग बुझने न पाए, यही हमारे प्राणों का संकल्प होना चाहिए।
देश के खातिर मर मिटना ही हर सच्चे भारतीय का परम कर्तव्य है।
राष्ट्रीयता की भावना केवल पुरुषों की बपौती नहीं है, नारी भी देश के लिए सर्वस्व न्योछावर कर सकती है।
वीरों का कैंची और हथकड़ियों से कभी भी हौसला पस्त नहीं होता।
रोने से कब दुख कम होता है? जीवन तो संघर्षों की एक सतत यात्रा है।
अधिकारों की रक्षा के लिए अंत तक लड़ना ही सच्ची मनुष्यता है।
घायल हो कर गिरी सिंहनी वह वीर गति को प्राप्त हुई, इतिहास पुरुष भी साक्षी है उसकी अद्भुत गाथा का।

सुभद्रा कुमारी चौहान के बारे में

सुभद्रा कुमारी चौहान हिंदी की अत्यंत लोकप्रिय और राष्ट्रीय चेतना की ओजस्वी कवयित्री थीं। उनका जन्म इलाहाबाद के निहालपुर गाँव में हुआ था और वे अपनी वीररस की कविताओं के लिए अमर हैं। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट झलकती है। पूरा परिचय और सभी विचार: सुभद्रा कुमारी चौहान — लेखक कोश।

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लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 29 September 2026 · अपडेट: 29 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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