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19 Oct 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
मैक्सिम गोर्की: झूठ चाहे कितना भी ताकतवर दिखे, अंततः
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

झूठ चाहे कितना भी ताकतवर दिखे, अंततः

सच की रोशनी उसे मिटा देती है।

— मैक्सिम गोर्की

और यथार्थवाद के पक्ष में रहा है। यह कथन बताता है कि असत्य भले ही छल या ताकत के बल पर कुछ समय के लिए प्रभावशाली दिखे, लेकिन उसका वजूद स्थायी नहीं हो सकता। जिस प्रकार अंधकार कितना भी

मैक्सिम गोर्की की चुनी हुई पंक्तियाँ

स्वतंत्रता और न्याय के बिना कोई समाज महान नहीं बन सकता।
न्याय केवल एक कानूनी शब्द नहीं, बल्कि इंसानी समाज की बुनियादी जरूरत है।
हर महान व्यक्ति ने अपने जीवन में भारी संघर्ष किया है।
दुख इंसान को मजबूत बनाता है और उसे गहराई देता है।
अंधकार से लड़ने का एकमात्र तरीका ज्ञान का प्रकाश फैलाना है।
मनुष्य—यह शब्द कितना गर्व से गूंजता है!
जो लोग दूसरों के दुखों को महसूस नहीं कर सकते, वे जीने का अधिकार खो चुके हैं।

मैक्सिम गोर्की के बारे में

मैक्सिम गोर्की (1868–1936) रूस के महान लेखक और समाजवादी यथार्थवाद के संस्थापक थे। उनका वास्तविक नाम अलेक्सेई मिखाइलोविच पेशकोव था। उन्होंने अपनी रचनाओं में रूसी समाज के निचले तबके, मजदूरों और गरीबों के जीवन का सजीव चित्रण किया। पूरा परिचय और सभी विचार: मैक्सिम गोर्की — लेखक कोश।

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वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 19 October 2026 · अपडेट: 19 October 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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