
साम्प्रदायिकता मानवता की सबसे बड़ी दुश्मन
है, जो इंसानों को बांटती है।
— भीष्म साहनी
प्रसिद्ध कथाकार और ‘तमस’ के रचयिता भीष्म साहनी की यह पंक्ति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि साम्प्रदायिकता समाज को भीतर से तोड़ती है। साहनी जी का
भीष्म साहनी की चुनी हुई पंक्तियाँ
इंसान की पहचान उसके ओहदे या संपत्ति से नहीं, बल्कि संकट के समय उसके मानवीय फैसलों से होती है।
विभाजन की त्रासदी ने इंसानी रिश्तों को जो जख्म दिए, वे आज भी पूरी तरह भर नहीं पाए हैं।
रंगमंच और नाटक समाज के सीधे संवाद का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
विभाजन ने सरहदों को तो खींच दिया, लेकिन दिलों के रिश्तों और साझा संस्कृति को पूरी तरह मिटाया नहीं जा सका।
मध्यवर्गीय जीवन की विसंगतियां और दिखावा व्यक्ति की सच्ची संवेदनाओं को धीरे-धीरे कुचल देते हैं।
सच्चा साहित्य वही है जो शोषित और पीड़ित मनुष्य के आंसुओं को पोंछने की कुव्वत रखता हो।
हर दौर की अपनी चुनौतियां होती हैं, और लेखक को उनका सामना करना पड़ता है।
भीष्म साहनी के बारे में
भीष्म साहनी (8 अगस्त 1915 – 11 जुलाई 2003) हिंदी के शीर्षस्थ कथाकार और उपन्यासकार थे। वे 'तमस' उपन्यास और मानवीय सरोकारों से जुड़ी कहानियों के लिए अमर हैं। प्रगतिशील लेखक संघ और जन संस्कृति मंच से उनका गहरा जुड़ाव रहा। पूरा परिचय और सभी विचार: भीष्म साहनी — लेखक कोश।
विज्ञापन · Advertisement
ये भी पढ़ें
काव्यरहीम ख़ानेख़ाना: रहिमन ओछे नरन ते, बैर भलो ना नाइ। छाँड़ेरहिमन ओछे नरन ते, बैर भलो ना नाइ। छाँड़े ड़े काटै क्यौं भलो, काटे चाटे काइ॥ — रहीम ख़ानेख़ाना17 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यहरिवंश राय बच्चन: दोनों हाथ जिसे दिखलाते हैं सूनापन, वेदोनों हाथ जिसे दिखलाते हैं सूनापन, वे दोनों हाथ समर्पित हैं तुझको हे जीवन! — हरिवंश राय बच्चन12 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यहेनरी फोर्ड: अधिकांश लोग तब अधिक अवसर पाते हैं जब दूसरेअधिकांश लोग तब अधिक अवसर पाते हैं जब दूसरे लोग उन्हें समस्याओं के रूप में देखते हैं। — हेनरी फोर्ड3 Oct 2026 पढ़ें →
काव्यसुन त्ज़ू: यदि शत्रु बलवान है, तो उसके लिए तैयारीयदि शत्रु बलवान है, तो उसके लिए तैयारी करो; यदि वह क्रोधित है, तो उसे भड़काओ। — सुन त्ज़ू2 Oct 2026 पढ़ें →