
मेहनत और लगन से किया गया हर सामाजिक
कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता।
— फ़ातिमा शेख़
भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका फ़ातिमा शेख़ की यह पंक्ति समाज-सुधार के प्रति उनके अटूट विश्वास और कर्मठता को दर्शाती है। यह कथन कहता है कि
फ़ातिमा शेख़ की चुनी हुई पंक्तियाँ
सच्ची मानवता वही है जो हर ज़रूरतमंद का हाथ थामे और उसे आगे बढ़ाए।
हर वंचित तक इल्म पहुँचाना ही जीवन का सबसे बड़ा और सच्चा धर्म है।
फ़ातिमा शेख़ ने अपनी जान की परवाह किए बिना रूढ़िवादी समाज का डटकर मुकाबला किया।
प्रेम और करुणा ही वे ताकतें हैं जो नफरत और भेदभाव के बंधनों को काटती हैं।
महाराष्ट्र सरकार और विभिन्न संगठनों ने उनके जीवन और कार्यों को पाठ्यक्रम में शामिल किया है।
फ़ातिमा शेख़ ने 1848 में पुणे में खुले उस विद्यालय में शिक्षण कार्य किया जो देश का पहला था।
उन्होंने ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर शिक्षा का प्रसार किया।
फ़ातिमा शेख़ के बारे में
फ़ातिमा शेख़ (1831–1900) भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका और ज्योतिराव तथा सावित्रीबाई फुले की सहकर्मी थीं। उन्होंने अपने भाई उस्मान शेख़ के घर में फुले दंपत्ति को आश्रय दिया और दलित-पिछड़ों की शिक्षा में अभूतपूर्व योगदान दिया। पूरा परिचय और सभी विचार: फ़ातिमा शेख़ — लेखक कोश।
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