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25 Oct 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
रसखान: मूँड़ मुँड़ाये हरि मिलैं, तो सब कोई मुँड़ा
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

मूँड़ मुँड़ाये हरि मिलैं, तो सब कोई मुँड़ाय।

बार-बार मुँड़न फिरे, बार-बार बढ़ जाय।

— रसखान

यह पंक्ति धार्मिक बाह्याडंबरों और ढोंग पर तीखा प्रहार करती है। इसका सीधा अर्थ है कि यदि केवल सिर मुँड़ाने या बाहरी वेशभूषा बदलने से ईश्वर की प्राप्ति हो जाती

रसखान की चुनी हुई पंक्तियाँ

काग के भाग बड़े सजनी, हरि हाथ से ले गयो माखन रोटी।
प्रेम वाटिका के हरे भरे पौधे हर दिल में प्रेम जगाते हैं
प्रेम सुधानिधि जो जन चाखै, तासु प्रताप जगत में राखै।
या मुख की मुस्कानि संभालि न जै है, न जै है, न जै है।
बिनु गोपाल बैरिन भइ कुंजैं, तब लता लगत अति सीतल, अब भइ विषम ज्वाल की पुंजैं।
आठहुं सिद्धि नवनिधि के सुख नन्द की गाइ चराइ बिसारौं
जो खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालकूल कुल कदंब की डारन

रसखान के बारे में

रसखान हिंदी साहित्य के भक्तिकाल के प्रमुख कृष्ण-भक्त कवि थे। इनका जन्म 1548 ईस्वी में हुआ और इनका वास्तविक नाम सैयद इब्राहिम था। वज्रभूमि और कृष्ण के प्रति इनकी अनन्य भक्ति इनकी रचनाओं का मुख्य आधार रही है। पूरा परिचय और सभी विचार: रसखान — लेखक कोश।

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लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 25 October 2026 · अपडेट: 25 October 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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