
निंदा ऐकोनिया जो रागारे ना, तोचि जाणा संत खरा।
— संत तुकाराम
महाराष्ट्र के महान संत तुकाराम इस पंक्ति के माध्यम से सच्चे संत या श्रेष्ठ मनुष्य की पहचान बताते हैं। इसका सरल अर्थ है— जो व्यक्ति अपनी निंदा या बुराई सुनकर भी कभी क्रोधित नहीं होता, वही
संत तुकाराम की चुनी हुई पंक्तियाँ
संतांचे संगती मन हे निर्मळ। उघडे हे बळ नामाचेची।
अन्न हे पूर्णब्रह्म, उदरभरण नव्हे जाणिजे यज्ञ।
काया वाचा मनें धरावा विठोबा, दुःख सांडा लोभाचे ते।
खरा तो एक धर्म, ज्याचे समाधान। मनासी पावे पूर्ण प्रेमभक्ती।
नामाशिवाय नाही जगी तारण, हेचि सत्य जाण त्रिवार सत्य।
मनी नाही भाव, म्हणे देव मला पाव।
बोलावा विठ्ठल पहावा विठ्ठल। करावा विठ्ठल जीवभावा।
संत तुकाराम के बारे में
संत तुकाराम महाराज महाराष्ट्र के एक महान वारकरी संत और कवि थे। उन्होंने भक्ति और समाज सुधार के अपने अद्वितीय अभंगों के माध्यम से जनमानस को जागृत किया। उनका पूरा जीवन विट्ठल की भक्ति और मानवता की सेवा को समर्पित था। पूरा परिचय और सभी विचार: संत तुकाराम — लेखक कोश।
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