वाह वाह यारहिंदी में जानकारी · पूरे भारत के लिए
मेनू
WhatsApp चैनल
12 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
मुंशी प्रेमचंद: सत्य सबसे बड़ा बल है, इसके सामने बड़े-बड़े
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

सत्य सबसे बड़ा बल है, इसके सामने बड़े-बड़े

साम्राज्य झुक जाते हैं।

— मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद की यह पंक्ति सत्य की अजेय और परम शक्ति को रेखांकित करती है। उनका आशय है कि बाहरी बल, छल-कपट या सत्ता चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, वह हमेशा के लिए सच को दबा नहीं सकती। जब कोई व्यक्ति या समाज सत्य और न्याय के मार्ग पर चलता है, तो बड़े से बड़े अधार्मिक साम्राज्य और तानाशाही शासन भी अंततः उसके सामने नतमस्तक होने को विवश हो जाते हैं। प्रेमचंद का कथाकार मिजाज हमेशा से शोषितों, पीड़ितों और सच्चाई के पक्ष में खड़ा रहा है। वे आदर्शोन्मुख यथार्थवाद के पैरोकार थे, इसलिए उनके साहित्य में अन्याय के विरोध में नैतिक बल की जीत का अटूट विश्वास झलकता है। वे मानते थे कि साहित्य और मनुष्य का सबसे बड़ा आधार सत्य ही है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी इंसान को टूटने नहीं देता और उसे भीतर से मजबूत बनाता है।

आज के दौर में, जब झूठ, प्रलोभन, और छल-कपट का बोलबाला बढ़ गया है और भौतिक ताकत व धन को ही सब कुछ मान लिया गया है, तब प्रेमचंद की यह बात और अधिक प्रासंगिक हो जाती है। वर्तमान समय में भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले साधारण लोग अक्सर सत्ता और धन की ताकत से डर जाते हैं। ऐसे में यह पंक्ति हमें यह याद दिलाती है कि अन्याय चाहे कितना भी शक्तिशाली और स्थायी क्यों न प्रतीत हो, उसकी नींव खोखली होती है। इतिहास गवाह है कि अंततः जीत सत्य की ही होती है। यह कथन आज के युवाओं और समाज को यह प्रेरणा देता है कि वे अपने जीवन में सत्य का दामन न छोड़ें, क्योंकि सत्य की वह आंतरिक शक्ति है जिसके आगे हर प्रकार का कृत्रिम अहंकार और अन्याय अंततः घुटने टेक देता है।

मुंशी प्रेमचंद की चुनी हुई पंक्तियाँ

समय की नदी में जो बह गया, वह फिर कभी लौटकर वापस नहीं आता।
सच्चा प्रेम वही है जो स्वार्थ से परे हो और त्याग की कसौटी पर खरा उतरे।
शिक्षा वही सच्ची है जो मनुष्य के भीतर विवेक और मानवता को जाग्रत करे।
साहित्य राजनीति के आगे-आगे चलने वाली मशाल है।
ईमानदारी और सच्चाई का मार्ग कठिन जरूर होता है, पर अंततः विजय उसी की होती है।
हिम्मत हारने वाले को दुनिया कभी याद नहीं रखती, लड़ने वाले ही इतिहास रचते हैं।
त्याग के बिना प्रेम अधूरा है और न्याय के बिना समाज।

मुंशी प्रेमचंद के बारे में

मुंशी प्रेमचंद (31 जुलाई 1880 – 8 अक्टूबर 1936) हिंदी और उर्दू के महान कथाकार थे। उन्हें 'उपन्यास सम्राट' कहा जाता है। उन्होंने भारतीय गाँव और समाज को साहित्य के केंद्र में रखा। पूरा परिचय और सभी विचार: मुंशी प्रेमचंद — लेखक कोश

विज्ञापन · Advertisement
शेयर:FacebookTelegram

ये भी पढ़ें

awaraalfaz
लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 12 September 2026 · अपडेट: 12 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *