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14 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
सुमित्रानंदन पंत: सत्य अహిंसा का आलोक, भर दे जग में नया विश्
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

सत्य अహిंसा का आलोक, भर दे जग में नया विश्वास,

मिटे दूर हो सारे शोक, हो सबका हित का प्रकाश।

— सुमित्रानंदन पंत

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छायावाद के प्रमुख स्तंभ सुमित्रानंदन पंत की यह पंक्तियाँ मानवीय संचेतना और गांधीवादी आदर्शों का सुंदर संगम हैं। प्रकृति और मानवता के इस चितेरे कवि का

सुमित्रानंदन पंत की चुनी हुई पंक्तियाँ

जन का है जीवन वरदान, प्रकृति का सौंदर्य महान।
प्रकृति के साथ मनुष्य की अंतरंगता ही पंत के काव्य का मूल आधार है।
जग का जीवन ही श्रम-बल है, कर्मवीर का यह संबल है, पसीना बन बहती धारा, जीवन का पावन बल है।
वियोगी होगा पहला कवि, सेहकर से उपजा होगा गान।
उमड़कर आँखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान।
परिवर्तन कविता में समय के चक्र और प्रकृति के शाश्वत रूप का सुंदर चित्रण है।
वियोग का यह सुंदर क्षण, जीवन का मौन समर्पण।
सच और ईमानदारी की राह, कठिन भले हो पर है सुखद, इसके बल पर ही जग भर में, मानव का मस्तक है उन्नत।

सुमित्रानंदन पंत के बारे में

सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उन्हें प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में जाना जाता है, जिनकी रचनाओं में कोमल भावनाओं और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत चित्रण मिलता है। पूरा परिचय और सभी विचार: सुमित्रानंदन पंत — लेखक कोश

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लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 14 September 2026 · अपडेट: 14 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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