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19 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
स्वामी सहजानंद सरस्वती: भूखे पेट ईश्वर की भक्ति नहीं होती, पीड़ित
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

भूखे पेट ईश्वर की भक्ति नहीं होती, पीड़ित

किसान को रोटी दिलाना ही असली पूजा है।

— स्वामी सहजानंद सरस्वती

स्वामी सहजानंद सरस्वती की यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि बुनियादी ज़रूरतों, विशेषकर भोजन के बिना धर्म और भक्ति का कोई अर्थ नहीं रह जाता। वे कर्म को ही सच्चा धर्म मानते थे। उनका मिजाज एक क्रांतिकारी चेतना और व्यावहारिक सोच से भरा था, जहाँ वे कोरी आध्यात्मिकता के स्थान पर सामाजिक न्याय के पक्षधर थे। उनके अनुसार, पूजा-पाठ से अधिक पवित्र काम उस अन्नदाता किसान के पेट की भूख मिटाना है, जो पूरे देश का पोषण करता है।

आज के संदर्भ में यह विचार और भी अधिक प्रासंगिक है, जब किसान आर्थिक संकट और मौसम की मार झेल रहे हैं। यह पंक्ति बताती है कि किसी भी समाज की उन्नति का वास्तविक पैमाना उसके सबसे मेहनतकश वर्ग की खुशहाली में निहित है। केवल कागज़ी दावों या धार्मिक आडंबर के बजाय किसानों को उनका अधिकार, सही मूल्य और सम्मान दिलाना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। स्वामी जी का यह संदेश मानवता और सामाजिक दायित्व की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करता है।

स्वामी सहजानंद सरस्वती की चुनी हुई पंक्तियाँ

सच्चा साधु वही है जो अन्याय के सामने सिर न झुकाए और सत्य के लिए संघर्ष करे।
लेखनी और वाणी दोनों का उपयोग जनहित और समाज सुधार के लिए होना चाहिए।
अधिकार मांगने से नहीं छीनने से मिलते हैं, अब हाथ जोड़ने का नहीं संघर्ष का समय है।
खेत-खलिहान में पसीना बहाने वाले सभी मजदूर और किसान भाई हैं, उनमें कोई भेद नहीं।
दुनिया को अन्न देने वाला किसान किसी की दया का नहीं, अपने अधिकार का हकदार है।
किसानों और मजदूरों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने वाली चेतना ही सच्ची शिक्षा है।
मेहनत करने वाले को उसका हक मिलना ही चाहिए, यही सच्चा धर्म और समाजवाद है।

स्वामी सहजानंद सरस्वती के बारे में

स्वामी सहजानंद सरस्वती (1889–1950) आधुनिक भारत के महान किसान नेता, स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर समाजवादी विचारक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शोषित किसानों के अधिकारों और जमींदारी प्रथा के उन्मूलन के लिए समर्पित कर दिया। पूरा परिचय और सभी विचार: स्वामी सहजानंद सरस्वती — लेखक कोश

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वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 19 September 2026 · अपडेट: 19 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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