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24 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
भीष्म साहनी: साम्प्रदायिकता मानवता की सबसे बड़ी दुश्मन
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

साम्प्रदायिकता मानवता की सबसे बड़ी दुश्मन

है, जो इंसानों को बांटती है।

— भीष्म साहनी

प्रसिद्ध कथाकार और ‘तमस’ के रचयिता भीष्म साहनी की यह पंक्ति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि साम्प्रदायिकता समाज को भीतर से तोड़ती है। साहनी जी का

भीष्म साहनी की चुनी हुई पंक्तियाँ

इंसान की पहचान उसके ओहदे या संपत्ति से नहीं, बल्कि संकट के समय उसके मानवीय फैसलों से होती है।
विभाजन की त्रासदी ने इंसानी रिश्तों को जो जख्म दिए, वे आज भी पूरी तरह भर नहीं पाए हैं।
रंगमंच और नाटक समाज के सीधे संवाद का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
विभाजन ने सरहदों को तो खींच दिया, लेकिन दिलों के रिश्तों और साझा संस्कृति को पूरी तरह मिटाया नहीं जा सका।
मध्यवर्गीय जीवन की विसंगतियां और दिखावा व्यक्ति की सच्ची संवेदनाओं को धीरे-धीरे कुचल देते हैं।
सच्चा साहित्य वही है जो शोषित और पीड़ित मनुष्य के आंसुओं को पोंछने की कुव्वत रखता हो।
हर दौर की अपनी चुनौतियां होती हैं, और लेखक को उनका सामना करना पड़ता है।

भीष्म साहनी के बारे में

भीष्म साहनी (8 अगस्त 1915 – 11 जुलाई 2003) हिंदी के शीर्षस्थ कथाकार और उपन्यासकार थे। वे 'तमस' उपन्यास और मानवीय सरोकारों से जुड़ी कहानियों के लिए अमर हैं। प्रगतिशील लेखक संघ और जन संस्कृति मंच से उनका गहरा जुड़ाव रहा। पूरा परिचय और सभी विचार: भीष्म साहनी — लेखक कोश।

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लेखकawaraalfaz

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प्रकाशित: 24 September 2026 · अपडेट: 24 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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