
शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि वह पैनापन है
जिससे इंसान सही और गलत में फर्क करना सीखता है।
— रघुवीर सहाय
रघुवीर सहाय हिंदी साहित्य के अत्यंत सजग और यथार्थवादी कवि थे, जो अपनी पत्रकारिता जैसी पैनी सामाजिक दृष्टि के लिए जाने जाते हैं। उनकी यह पंक्ति शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को बेहद सरल शब्दों में परिभाषित करती है। कवि का मिजाज हमेशा से समाज की विसंगतियों पर चोट करने और मनुष्य को जागरूक बनाने का रहा है।
रघुवीर सहाय की चुनी हुई पंक्तियाँ
वे लोग कितने भाग्यशाली हैं जो अपना काम पूरी ईमानदारी और बिना किसी शोरगुल के पूरा कर जाते हैं।
वे 'दूसरा सप्तक' (1951) के प्रमुख कवियों में शामिल किए जाते हैं।
दोस्ती वही सच्ची है जो संकट के समय बिना किसी शर्त के आपके साथ चट्टान की तरह खड़ी रहे।
हँसो जल्दी हँसो
इस लोकतंत्र में हँसना ही एकमात्र बचा हुआ उपाय है
इस लोकतंत्र में हँसना ही एकमात्र बचा हुआ उपाय है
लोकतंत्र में पत्रकारिता और कविता दोनों को उन्होंने जनता की आवाज बनाया।
उनकी भाषा बहुत सीधी और आम बोलचाल के करीब थी, जो व्यंग्य से भरी होती थी।
प्रेम कोई दिखावा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में एक-दूसरे का साथ निभाना और भरोसा रखना है।
रघुवीर सहाय के बारे में
रघुवीर सहाय हिंदी कविता के शमशेर युग के प्रमुख कवि और पत्रकार थे। वे 'दूसरा सप्तक' के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। उन्होंने आम आदमी के दैनिक जीवन और लोकतंत्र की विडंबनाओं को अपनी रचनाओं का मुख्य विषय बनाया। पूरा परिचय और सभी विचार: रघुवीर सहाय — लेखक कोश।
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